हिमाचल के सबसे बड़े सीवेज प्लांट से सोलन जा रहा गंदा पानी
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दिन बुधवार। समय 12.05 बजे। जगह हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा लालपानी सीवेज प्लांट (बड़ा गांव शिमला)। यहां से सीवेज को ट्रीट करके नाले में छोड़ा जाता है। यह आगे दोगड़ा पुल में जाकर मिलता हैं, जहां से यह सीवेज साधुपुल होते हुए सोलन की तरफ जाता है। यह भी एक वजह है जो सोलन में पीलिया के मामले सामने आ रहे हैं।
मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के बारे में तो सरकार की ओर से इसकी दशा सुधारने के आदेश दिए हैं लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े ट्रीटमेंट प्लांट की सुध किसी ने नहीं ली। ‘अमर उजाला’ की टीम जब मौके पर पहुंची तो यहां कई खामियां नजर आईं। इतना ही नहीं यहां मौजूद कर्मचारियों ने अपनी व्यथा भी सामने रखी।
कुल मिलाकर ट्रीटमेंट के नाम पर यहां केवल स्ट्रक्चर खड़ा है और अधिकांश मशीनें खराब पड़ी हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में न्यू शिमला, बीसीएस, खलीनी, टालैंड, रिज, लोअर बाजार, मालरोड, घोड़ा चौकी और तारादेवी का सीवेज ट्रीटमेंट आता है। प्लांट की क्षमता 19.35 है जबकि यहां 4.50 एमएलडी सीवेज ही ट्रीटमेंट के लिए आ रहा है।
एक कलैरीफ्लोओक्यूलेटर ही कर रहा काम
मिक्सर के बाद सीवेज सीधा कलैरीफ्लोओक्यूलेटर में जाता है। यहां दो कलैरीफ्लोओक्यूलेटर लगे हैं लेकिन इनमें से एक ही सही ढंग से काम कर रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट होने के बाद उसमें जो स्लज होता है वो फिल्टर प्रेस में आता है। फिल्टर प्रेस खराब है।
टूटा पड़ा स्लज बैड
फिल्टर प्रेस में जो स्लज आता है वो उसे स्लज बैड में भेज देता है। लेकिन दो में से एक स्लज बैड टूटा पड़ा है। चल रहे स्लज बैड की स्थिति ठीक है लेकिन उसमें सालों का स्लज पड़ा है।
एक यूएसबी रिएक्टर कर रहा काम
ग्रिट चैनल से सारा सीवेज छनने को यूएसबी रिएक्टर में जाता है। प्लांट में दो यूएसबी रिएक्टर हैं लेकिन मौजूदा समय में एक ही चल रहा है। इसकी भी पीबीसी प्लेटें टूटी हैं। ट्रीटमेंट प्रोसेस ठीक से नहीं हो रहा है।
सालों से ग्रिट चैनल ठप
शहर का सारा सीवेज लाइन से इकट्ठा होकर सबसे पहले ग्रिट चैनल में आता है। उस चैनल में जितना भी मोटा ग्रिट आता है मशीन द्वारा बाहर निकाला जाता है। लेकिन मशीन के खराब होने से कुछ मजदूरों द्वारा हाथों से निकाला जा रहा है लेकिन ज्यादातर ग्रिट सीधे आगे जा रहा है।
फ्लैश और आलम मिक्सर खराब
ओरिएशन टैंक के बाद सीवेज का पानी मिक्सर में जाता है यहां ब्लीचिंग पाउडर मिक्स किया जाता है। पानी को साफ करने के लिए आलम भी मिक्स किया जाता है। मिक्सर के खराब होने से सीवेज में किसी भी तरह का पाउडर नहीं मिलाया जाता। प्लांट में कुल पांच ओरिएशन टैंक हैं लेकिन मौजूदा समय में दो ही टैंक ट्रीट कर रहे है ।
उपकरण खराब, हाथों से करना पड़ रहा है काम
मौके पर मौजूद कर्मचारी मैनुअल ही सीवेज को ग्रीट से अलग कर रहे थे। कारण ग्रीट मशीन खराब पड़ी है। इसलिए कर्मचारियों को यह काम हाथों से करना पड़ रहा है। दूसरे चरण में सीवेज को वहां से यूएएसबी रिएक्टर में भेजा जाता है। इनमें भी दो में से एक ही काम कर रहा है। इसके बाद स्लज ओरीएटन टैंक में जाता है वह भी पांच में से दो ही चल रहे हैं। जो दो चल रहे हैं वह भी अधूरे हैं।
इसके बाद स्लज वहां से होकर क्लीयरफायर में ट्रीट के लिए जाता है। लेकिन पांच क्लीयरफायरों में से दो ही चल रहे हैं। इसके बाद मिक्सर का काम होता है लेकिन वह पूरी तरह से ठप पड़ा है। इसके बाद स्लज फिल्टर प्रेस में जाता है जो किसी तरह के काम करने में सक्षम नहीं है। इसके बाद स्लज को स्लज बैड में रखा जाता है। यहां दो में से एक बैड टूटा हुआ है।
बिना मास्क, ग्लबज के काम
प्लांट में काम कर रही लेबर ने किसी तरह के मास्क और ग्लबज नहीं लगा रखे थे। मजदूरों ने कहा कई बार वर्दी, ग्लबस और मास्क के लिए कहा गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।