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दिन भर टीवी से चिपका रहा इंद्रजीत का परिवार, अमन के गांव में मातम

Tue, 03 Apr 2018 09:50 AM IST
विक्रम मेहरा/विपिन चौधरी, अमर उजाला, लंज (कांगड़ा)/धर्मशाला
विक्रम मेहरा/विपिन चौधरी, अमर उजाला, लंज (कांगड़ा)/धर्मशाला Updated Tue, 03 Apr 2018 09:50 AM IST
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mortal remains of inderjeet and aman arrived for dehra dharamshala himachal

इराक से पार्थिव अवशेष लाने की खबर के बीच मृतक इंद्रजीत और अमन के गांव में भी मातम पसर गया है। इराक के मोसुल में आतंकियों की ओर से मारे गए देहरा विधानसभा क्षेत्र की भटहेड़ पंचायत के कदरेटी गांव के इंद्रजीत के परिवार ने पूरा समय टीवी देखकर गुजारा। 

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इंद्रजीत के परिवार को जब से पता चला है कि राज्य विदेश मंत्री वीके सिंह इराक में 39 भारतीयों के पार्थिव अवशेष लाने गए हैं, तब से परिवार के सभी सदस्य टीवी पर पल-पल की अपडेट ले रहे हैं। इंद्रजीत के बड़े भाई सुभाष चंद का कहना है कि भाई का अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा। 
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कहा कि हमारा परिवार पिछले चार साल से तिल-तिल कर मर रहा था। उन्होंने बताया कि चार साल में बेटे के गम में पिता तो दिल की बीमारी और माता को पैरालाइज अटैक आ गया। इनका महंगा इलाज करवाने में परिवार असमर्थ है। सरकार ने परिवार के बारे में कुछ नहीं सोचा है।
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बेटे के बारे में बात करने पर बेसुध हो गई मां
इंद्रजीत के पिता परदेसी राम ने कहा कि उनके परिवार का कोई सदस्य अमृतसर नहीं गया है। एसडीएम देहरा ने कहा है कि मंगलवार सुबह बेटे के पार्थिव अवशेष आ जाएंगे। पैरालाइज बीमारी से ग्रस्त इंद्रजीत की मां सुलोचना देवी बेटे के बारे में पूछने पर बेसुध हो जाती हैं। 

पिता बोले - हिमाचल सरकार ने नहीं ली सुध

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इंद्रजीत के पिता परदेसी राम ने कहा कि पंजाब सरकार अपने प्रदेश के पीड़ित परिवारों को 2014 से 20 हजार रुपये महीना दे रही है। सरकार यह राशि तब तक देने की बात कर रही है, जब तक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं मिलती।

कहा कि हमारा बेटा तो कुंवारा था, लेकिन जिन बच्चों के सिर से उनके पिता का साया उठ गया है और जिनके घर पर कमाने वाला कोई नहीं, उनका क्या होगा। प्रदेश सरकार को भी पंजाब की तरह पीड़ित परिवारों की मदद करनी चाहिए। घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देनी चाहिए।

खोने-पाने के लिए अब कुछ नहीं बचा 
फतेहपुर। फतेहपुर के धमेटा के संदीप की पत्नी, माता-पिता, बच्चे और पूरा परिवार पार्थिव देह के अवशेषों के आने का इंतजार कर रहा है। संदीप के जीजा बलवंत सिंह का कहना कि खोने-पीने के लिए अब कुछ नहीं बचा है। बस संदीप के अवशेषों का इंतजार बाकी है। उनका कहना है कि अभी तक उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है कि संदीप के अवशेष कब तक मिलेंगे। उनके परिवार से अमृतसर कोई नहीं गया है। 

अमन के इराक जाने वाले दिन को कोस रहा परिवार

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अमन को विदेश जाने की जरूरत नहीं थी, लेकिन परिवार को उसकी जिद के आगे झुकना पड़ा था। इराक के मोसुल में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की क्रूरता का शिकार हुए धर्मशाला के अमन की मां और दादी ने रुंधे गले से यह बात कही।

अमन की मां बीना देवी और दादी तारा देवी उस वक्त को कोस रही हैं, जब उन्होंने अमन को विदेश इराक भेजने की हामी भरी थी। उन्होंने बताया कि अमन की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा था।  उधर, अमन के पार्थिव अवशेष आने की सूचना के बाद उसके पैतृक गांव पास्सू में मातम का माहौल है।

रिश्तेदारों के साथ गांव के लोग भी अमन के परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।अमन के भाई रमन ने बताया कि मंगलवार को पार्थिव अवशेषों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसी दिन शाम को वे परिवार सहित हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के लिए रवाना हो जाएंगे।

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