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Shimla News: फल मिलेंगे जंगलों के अंदर, भोजन की तलाश में शहर नहीं आएंगे बंदर

Thu, 30 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:59 PM IST
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Monkeys will find fruit within the forests; they will not come to the city in search of food.
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वन विभाग पौधरोपण अभियान में जंगलों में रोपेगा फलदार पौधे, शहतूत, अखरोट, दाड़ू और जामुन के पौधे लगेंगे वन विभाग संस्थानों को वितरित कर रहा देसी प्रजातियों के पौधे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में इस बार वन विभाग पौधारोपण अभियान के तहत फलदार पौधों पर भी विशेष जोर दे रहा है। विभाग का मानना है कि जंगलों में फलदार पौधे लगाने से बंदरों और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक खाद्य स्रोत उपलब्ध होंगे जिससे उनके रिहायशी क्षेत्रों की ओर आने की प्रवृत्ति कम होगी।
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शिमला शहर समेत जिले के कई हिस्सों में बंदरों की समस्या है। इसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग इस बार शहतूत, अखरोट, कैंथ, दाड़ू और जामुन जैसे फलदार पौधे बड़े स्तर पर रोप रहा है। यह पौधे हरियाली बढ़ाने के साथ पक्षियों और वन्यजीवों के लिए भी भोजन का स्रोत बनेंगे। जिले में पौधारोपण अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न संस्थाओं और सरकारी विभागों की ओर से प्रतिदिन सैकड़ों पौधे रोपे जा रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी वन विभाग की नर्सरियों में बड़ी संख्या में पौधे तैयार किए हैं, जिनका वितरण किया जा रहा है। शिमला शहरी वन मंडल की लालपानी और तारादेवी रेंज के टुटू स्थित गुरशाली नर्सरी से अब तक करीब साढ़े तीन हजार पौधे वितरित किए जा चुके हैं।
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जुलाई और अगस्त में सर्वाधिक पौधारोपण होता है। इस वर्ष लालपानी और गुरशाली नर्सरियों में गुड़हल, विलो (बेदी), हाइड्रेंजिया, देवदार, शहतूत, कनौर, बांज, अखरोट, पॉपलर, चौड़ी पत्ती वाली विभिन्न प्रजातियों के पौधे, कैंथ, दाड़ू तथा रीठा और पान जैसे औषधीय पौधे तैयार किए गए हैं। इसके अलावा जामुन, चूली सहित अन्य फलदार पौधे भी तैयार किए गए हैं, ताकि वन्यजीवों को प्राकृतिक खाद्य स्रोत उपलब्ध हो सकें।



भूस्खलन रोकने में भी मिलेगी मदद
वन विभाग ने ढलानों पर मिट्टी के कटाव को रोकने और उसकी पकड़ मजबूत करने वाली प्रजातियों के पौधों पर भी विशेष जोर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पौधे ढलानों को स्थिर बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को कम करने में सहायक होते हैं। टुटू स्थित गुरशाली नर्सरी में इस समय करीब 41 हजार पौधे तैयार हैं, जिनमें से अब तक लगभग ढाई हजार पौधे वितरित किए जा चुके हैं। वहीं लालपानी नर्सरी से भी करीब एक हजार पौधे विभिन्न विभागों, संस्थाओं और लोगों को उपलब्ध कराए गए हैं।



विभाग निभा रहा है सक्रिय भूमिका
रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, शिमला शहरी, सौरव जिंग्टा ने बताया कि वन विभाग पौधारोपण अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और नर्सरियों से विभिन्न प्रजातियों के पौधे वितरित किए जा रहे हैं। तारादेवी रेंज के डिप्टी रेंजर अशोक शर्मा ने बताया कि टुटू की तवी बीट स्थित गुरशाली नर्सरी से हर वर्ष पौधारोपण के लिए हजारों पौधे वितरित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विशेष रूप से देसी प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप पौधारोपण को बढ़ावा देना और शिमला में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
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