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आईजीएमसी में महिला को बंदर ने काटा
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शिमला। शहर की सड़कों और जंगलों के बाद अब अस्पतालों भी बंदरों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। खासकर प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में वीरवार को 75 साल की महिला को बंदर ने बुरी काट लिया। महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया। बंदरों के काटने के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर लोगों में भय का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक गुलाबो देवी अपने मरीज की देखभाल करने के लिए आईजीएमसी में आई है। सुबह के वक्त वह अस्पताल परिसर से बाहर की तरफ निकली इसी दौरान बंदर उन पर झपट पड़ा। बंदर ने महिला के दाहिने पैर को बुरी तरह काटा है। महिला को एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लगाया गया है। दूसरी ओर डीडीयू अस्पताल में दोपहर बारह बजे तक संजौली से पूजा, कार्ट रोड से निशा और नाभा से रिशभी बंदर के काटने के बाद एआरवी टीका लगवाने के लिए अस्पताल आए।
पीड़ितों को दी एआरवी वैक्सीन
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने कहा कि बंदरों के काटने के बाद अस्पताल आए सभी पीड़ित मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई है। अस्पताल में एआरवी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
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आईजीएमसी में बना रखा है बंदरों ने बसेरा
आईजीएमसी परिसर में बंदरों का अक्सर जमावड़ा रहता है। बंदरों की टोली कैंटीन, मेडिकल कॉलेज के रास्ते के अलावा विभिन्न ब्लॉक की खिड़कियों के बाहर रहती हैं। हालांकि यह खिड़कियां बंद रहती हैं लेकिन आए दिन बंदर अस्पताल के अंदर से छठी मंजिल से बाहर की ओर भी निकलते आराम देखे जा सकते हैं। बंदरों ने आईजीएमसी में अपना बसेरा बना रखा है।
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जानकारी के मुताबिक गुलाबो देवी अपने मरीज की देखभाल करने के लिए आईजीएमसी में आई है। सुबह के वक्त वह अस्पताल परिसर से बाहर की तरफ निकली इसी दौरान बंदर उन पर झपट पड़ा। बंदर ने महिला के दाहिने पैर को बुरी तरह काटा है। महिला को एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लगाया गया है। दूसरी ओर डीडीयू अस्पताल में दोपहर बारह बजे तक संजौली से पूजा, कार्ट रोड से निशा और नाभा से रिशभी बंदर के काटने के बाद एआरवी टीका लगवाने के लिए अस्पताल आए।
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पीड़ितों को दी एआरवी वैक्सीन
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने कहा कि बंदरों के काटने के बाद अस्पताल आए सभी पीड़ित मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई है। अस्पताल में एआरवी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
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आईजीएमसी में बना रखा है बंदरों ने बसेरा
आईजीएमसी परिसर में बंदरों का अक्सर जमावड़ा रहता है। बंदरों की टोली कैंटीन, मेडिकल कॉलेज के रास्ते के अलावा विभिन्न ब्लॉक की खिड़कियों के बाहर रहती हैं। हालांकि यह खिड़कियां बंद रहती हैं लेकिन आए दिन बंदर अस्पताल के अंदर से छठी मंजिल से बाहर की ओर भी निकलते आराम देखे जा सकते हैं। बंदरों ने आईजीएमसी में अपना बसेरा बना रखा है।