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कौन है नरेंद्र मोदी के पहले 'गुरु', पढ़िए ये खास खबर..

Tue, 29 Apr 2014 02:41 PM IST
Updated Tue, 29 Apr 2014 02:41 PM IST
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Modi learn many lesson of politics in Himachal

भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार को अपना पहला गुरु बताया है। मोदी का कहना है कि वो शांता ही थे जिनकी ऊंगली पकड़कर वह चलना सीखे और आज आगे बढ़ रहे हैं।

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कांगड़ा सीट से भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार की जीत सुनिश्चित करने पालमपुर आए मोदी ने कहा कि राजनीति के अपने शुरुआती दिनों में वे हिमाचल में रहे थे। यहां शांता से उन्हें काफी सीख मिली।
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इसके बाद उन्हें गुजरात जाना पड़ा। कुछेक कार्यकर्ता साथ थे लेकिन शांता और हिमाचल से मिली शिक्षा उनके बड़े काम आई। मोदी ने कहा कि हिमाचल से इतना लगाव है कि गुजरात छोड़ने पर कम और हिमाचल से बाहर जाने पर ज्यादा दुख होता है।
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हिमाचल में ऐसे हुई मोदी की शुरुआत

Modi learn many lesson of politics in Himachal

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने हिमाचल में राजनीति की पाठशाला के कई सबक सीखे। वह 1995 से 2000 तक भाजपा प्रभारी रहे।

कार्यकाल के पहले 3 साल बेहद मुश्किल थे। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने संगठन को जिंदा किया और 1998 में भाजपा 6 साल बाद सत्ता में लौटी।

2001 में वह पहले दिल्ली लौटे और फिर मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात गए। 16 फरवरी, 2014 की सुजानपुर रैली में मोदी ने माना था कि यहां का अनुभव गुजरात में उनके काम आया।

शिमला के यूएस क्लब से चलाया दफ्तर

Modi learn many lesson of politics in Himachal

मोदी को 1995 में राष्ट्रीय सचिव रहते हुए पहले हिमाचल और फिर हरियाणा, चंडीगढ़ का प्रभार दिया गया। जब वह हिमाचल आए तो पार्टी के पास न कार्यालय था, न ही संगठन के खाते में पैसे।

तब विधायक किशन कपूर के यूएस क्लब स्थित सरकारी मकान के एक कमरे में ऑफिस चलता था। जेपी नड्डा के घर में एक कमरा मोदी के लिए था।

दफ्तर में केवल एक टाइपराइटर था। मोदी दिल्ली से 2 कंप्यूटर लाए और दफ्तर शुरू किया। 1997 में चक्कर स्थित पार्टी मुख्यालय की आधारशिला रखी और 2000 में इसका उद्घाटन करवाया।

मोदी ने विपक्ष को लड़ना सीखाया

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मोदी ने यहीं आकर सीखा कि पहाड़ में सफर ज्यादा समय खाता है। उनके समय धूमल और सुरेश चंदेल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे। दोनों के साथ मिलकर मोदी ने भाजपा को विपक्ष में रहते हुए लड़ना सिखाया।

1998 में सुखराम के साथ भाजपा की गठबंधन सरकार बनवाई। दूरसंचार घोटाले में फंसे सुखराम से दोस्ती पर पार्टी की निंदा हो रही थी, लेकिन मोदी ने समझा कि सत्ता पाए बिना कैडर बढ़ाना मुश्किल है।

1996 में हमीरपुर में धूमल की हार और कुछ महीने बाद ज्वालामुखी कांड से भाजपा दोराहे पर थी। दो खेमों में बंटी भाजपा में मोदी के समय ही धूमल शांता के विकल्प के रूप में उभरे।

मीडिया से तब भी बचते थे और आज भी

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मोदी के समय भाजपा महासचिव रहे खुशीराम बालनाटाह कहते हैं कि मोदी का फोकस था कि संगठन में एक सिस्टम खड़ा हो और व्यक्ति विशेष पर निर्भरता न रहे।

वे कार्यकर्ताओं को टिप्स देकर मुद्दों से लैस करते थे। प्रवक्ता रहे गणेश दत्त बताते हैं कि पार्टी के पास डाक खर्च के लिए भी धन की कमी थी।

मोदी ने कूपन छापकर फंड जुटाने को कहा। मीडिया से तब भी दूर रहते थे और आज भी। प्रभारी बनने के करीब 3 साल बाद शिमला में प्रेस वार्ता की थी।

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