तनाव का शिकार: रात को सोने नहीं दे रहे हैं ऑनलाइन पढ़ाई के ख्याल
डॉ. अजीत चावला ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों की मोबाइल पर स्क्रीन देखने की टाइमिंग बढ़ गई है। ये टाइमिंग साढ़े चार से साढ़े छह घंटे पहुंच गई है। लगातार मोबाइल पर देखने के कारण उनकी आंखों का विजन कम होने लगा है।
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कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले करीब 80 फीसदी बच्चों में कई तरह के लक्षण दिखे हैं। इनकी आंखों की रोशनी पर असर पढ़ा है। लगातार मोबाइल और कंप्यूटर पर पढ़ाई से आंखों की रोशनी धुंधली होने के कई मामले सामने आए हैं। यही नहीं बच्चे मानसिक रुप से भी तनाव में जा रहे है। इन्हें रात को नींद नहीं आ रही। बार-बार इनकी नींद टूट रही है। इन्हें ऐसा लगता है कि कहीं मोबाइल तो नहीं बज रहा और ये नींद से जाग जाते हैं। 4 से 18 साल के विद्यार्थियों में इस तरह के कई लक्षण दिखे हैं।
आईजीएमसी में बाल रोग विभाग की ओर से दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस करवाई गई। इसमें हिमाचल, चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। लुधियाना से आए बाल रोग चिकित्सक डॉ. अजीत चावला ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों की मोबाइल पर स्क्रीन देखने की टाइमिंग बढ़ गई है। ये टाइमिंग साढ़े चार से साढ़े छह घंटे पहुंच गई है। लगातार मोबाइल पर देखने के कारण उनकी आंखों का विजन कम होने लगा है।
आंखें ड्राई रहने लगी हैं। सिरदर्द बढ़ रहा है। लगातार स्क्रीन पर रहने के कारण बच्चे पढ़ाई में पिछड़ने लगे हैं। अगर बच्चे लगातार मोबाइल देख रहे हैं तो वे प्रत्येक बीस मिनट बाद स्क्रीन से आंखें हटा लें। इसके अलावा आठ से नौ घंटे की नींद लेने की सलाह दी। इस अवसर पर आईजीएमसी बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. अंबिका सूद मौजूद रहे।
दो साल से कम आयु के बच्चों को न दें मोबाइल
डॉ. अजीत चावला ने बताया कि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन का कहना है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को अभिभावक मोबाइल फोन न दें। इस वक्त बच्चे का विकास हो रहा होता है, ऐसे में मोबाइल से बच्चों को दूर रखें।
बच्चों की हर हरकत पर नजर रखें अभिभावक
चिकित्सकों ने कहा कि लगातार बच्चों का मोबाइल पर रहना सेहत के लिए हानिकारक है। कई तरह के बदलाव बच्चों में आ रहे हैं। बात-बात में लड़ाई करने लग जाते हैं। तनाव में रहते हैं। अगर ऐसा कोई लक्षण दिखे तो अभिभावक तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।