ब्रेन स्ट्रोक पर अब मोबाइल ऐप से तत्काल मिलेगा इलाज
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ब्रेन स्ट्रोक पर अब मरीजों को तत्काल इलाज मिलेगा। इसके लिए एक मोबाइल ऐप तैयार किया गया है जो कि मरीज को तुरंत उपचार मुहैया करवाएगा। आईजीएमसी के न्यूरोलॉजी विभाग ने एक मोबाइल ऐप तैयार करवाया है। इस ऐप के जरिये मरीज को तुरंत उपचार सुविधा मुहैया करवाने की सुविधा प्रदान की जाएगी।
हाथ और पैर के काम न करने, जुबान में तोतलापन आना और किसी वस्तु को न उठा पाने के लक्षण अगर शरीर में हैं तो ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। यह बात प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी के न्यूरोलॉजी विभाग के एचओडी असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुधीर शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक मिडल ऐज और बुढ़ापे में अधिक होता है।
ब्रेन स्ट्रोक डे पर जागरूकता रैली का आयोजन
बताया कि बुधवार को वर्ल्ड ब्रेन स्ट्रोक जागरूकता रैली का आयोजन किया जाएगा। ब्रेन स्ट्रोक की पूर्व संध्या पर कॉलेज प्राचार्य डा. एसएस कौशल रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। इस कार्यक्रम का मकसद लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। रैली में न्यूरोलॉजी विभाग के डाक्टर पैरामेडिकल स्टॉफ और फार्मासिस्ट के अलावा सैकड़ों लोग भाग लेंगे।
रैली शाम चार बजे आईजीएमसी से रवाना होगी तथा डीसी कार्यालय से वापस होते हुए आईजीएमसी अस्पताल पहुंचेगी। रैली में भाग लेने वाले डाक्टर और मरीज इस दौरान लोगों को ब्रेन स्ट्रोक (पक्षाघात) होने पर कैसे इसका उपचार करे इसकी जानकारी पैम्फलेट और नारे लगवाते देंगे। अस्पताल में छह महीनों के दौरान 130 मामले ब्रेन स्ट्रोक के पहुंचे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री लांच करेंगे ऐप
डा. सुधीर शर्मा ने बताया कि वर्ल्ड ब्रेन स्ट्रोक डे पर स्वास्थ्य मंत्री वीरवार को ब्रेन स्ट्रोक स्मार्ट ऐप लांच करेंगे। ऐप की खासियत यह है कि इसमें मरीजों को स्ट्रोक होने पर नजदीकी उपचार करवाने में मदद मिलेगी। ऐप में तीन विकल्प होंगे। इसमें 108 को कॉल करना, जीपीएस की मदद से नजदीकी स्ट्रोक सेंटर की जानकारी पता लगाना और इमरजेंसी में अपने किसी कांटेक्ट को मेसेज चला जाएगा।
ब्रेन स्ट्रोक का इलाज अब हिमाचल प्रदेश में भी संभव है। कहा कि अगर मरीज को स्ट्रोक पड़ने पर साढ़े चार घंटों के अंदर इलाज मिल जाता है तो उसे बचाया जा सकता है। ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के लिए टीपीए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
दो तरह के होते हैं ब्रेन स्टोक
ब्रेन स्ट्रोक में व्यक्ति की नस ब्लॉक हो जाती है। इसमें व्यक्ति की खून की नस फट जाती है और कामन में नस का ब्लॉक होना होता है। अक्सर देखा गया है कि 80 प्रतिशत लोगों को दूसरी तरह का ब्रेन स्ट्रोक होता है जिसमें कि सही समय पर उपचार मिलने से पक्षाघात से बचा जा सकता है। प्रदेश में 2014 से लेकर अभी तक ब्रेन स्ट्रोक के 98 मरीजों का उपचार किया जा चुका है।
यह होता है पक्षाघात होने पर
आंखों के आगे अंधेरा छाना, शरीर का कमजोर होना और कुछ न बोल पाना इत्यादि।
इस तरह नहीं होगा पक्षाघात
संतुलित आहार लेने पर, व्यायाम करने पर और समय पर इलाज होने पर