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Shimla News: एचपीयू में अल्पसंख्यक युवाओं को मिलेगा उद्योग आधारित मुफ्त प्रशिक्षण
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प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना के तहत विवि को 79.70 लाख रुपये का अनुदान मंजूर
फोटोवोल्टिक असिस्टेंट और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स होंगे शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोजगारपरक कौशल देने के लिए 180 प्रशिक्षण सीटें उपलब्ध करवाई गईं हैं। प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना के तहत शुरू किए कार्यक्रम के लिए विवि को 79,70,475 रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है। प्रशिक्षण में युवाओं को व्यावहारिक और उद्योग आधारित तकनीकी कौशल दिया जाएगा।
विवि में सोलर फोटोवोल्टिक साइट सर्वे असिस्टेंट और सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन के कोर्स चलेंगे। प्रत्येक कोर्स में 90 सीटें हैं। प्रशिक्षण एक अक्तूबर से एचपीयू समरहिल परिसर में शुरू होगा। पंजीकरण 17 सितंबर से शुरू हो चुका है। प्रशिक्षण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और योजना के नियमों के अनुसार मासिक वजीफा मिलेगा। प्रशिक्षण पूरा करने वालों को सरकारी प्रमाणपत्र के साथ रोजगार हासिल करने में सहायता भी दी जाएगी। विवि के पीएम विकास योजना के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश ठाकुर ने कहा कि कार्यक्रम ऐसे युवाओं के लिए रोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है जो औपचारिक शिक्षा आगे जारी नहीं रख सके। उन्होंने पात्र युवाओं से सीमित सीटों को देखते हुए जल्द पंजीकरण करने का आग्रह किया।
दसवीं पास युवाओं के लिए भी अवसर
सोलर फोटोवोल्टिक साइट सर्वे असिस्टेंट पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए दसवीं पास होना जरूरी है। वहीं सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन के लिए दसवीं पास के साथ तीन साल का संबंधित कार्य अनुभव या 12वीं पास के साथ तीन साल का संबंधित कार्य अनुभव आवश्यक है। दोनों पाठ्यक्रमों में कुल 390 घंटे का प्रशिक्षण होगा और प्रतिदिन तीन घंटे कक्षाएं लगेंगी। आवेदन के लिए उम्मीदवारों को विज्ञापन में दिए क्यूआर कोड से आवेदन फॉर्म भरकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
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यह युवा होंगे पात्र
योजना के तहत मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के पात्र युवा आवेदन कर सकते हैं। कार्यक्रम में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो अलग-अलग कौशलों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। साइट सर्वे पाठ्यक्रम में सौर परियोजनाओं के लिए सर्वे से जुड़े तकनीकी काम की जानकारी दी जाएगी जबकि मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग पाठ्यक्रम में सौर पैनल निर्माण से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर रहेगा। इससे युवाओं को तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में काम के लिए जरूरी तकनीकी दक्षता हासिल करने का अवसर मिलेगा।
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फोटोवोल्टिक असिस्टेंट और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स होंगे शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोजगारपरक कौशल देने के लिए 180 प्रशिक्षण सीटें उपलब्ध करवाई गईं हैं। प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना के तहत शुरू किए कार्यक्रम के लिए विवि को 79,70,475 रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है। प्रशिक्षण में युवाओं को व्यावहारिक और उद्योग आधारित तकनीकी कौशल दिया जाएगा।
विवि में सोलर फोटोवोल्टिक साइट सर्वे असिस्टेंट और सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन के कोर्स चलेंगे। प्रत्येक कोर्स में 90 सीटें हैं। प्रशिक्षण एक अक्तूबर से एचपीयू समरहिल परिसर में शुरू होगा। पंजीकरण 17 सितंबर से शुरू हो चुका है। प्रशिक्षण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और योजना के नियमों के अनुसार मासिक वजीफा मिलेगा। प्रशिक्षण पूरा करने वालों को सरकारी प्रमाणपत्र के साथ रोजगार हासिल करने में सहायता भी दी जाएगी। विवि के पीएम विकास योजना के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश ठाकुर ने कहा कि कार्यक्रम ऐसे युवाओं के लिए रोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है जो औपचारिक शिक्षा आगे जारी नहीं रख सके। उन्होंने पात्र युवाओं से सीमित सीटों को देखते हुए जल्द पंजीकरण करने का आग्रह किया।
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दसवीं पास युवाओं के लिए भी अवसर
सोलर फोटोवोल्टिक साइट सर्वे असिस्टेंट पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए दसवीं पास होना जरूरी है। वहीं सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन के लिए दसवीं पास के साथ तीन साल का संबंधित कार्य अनुभव या 12वीं पास के साथ तीन साल का संबंधित कार्य अनुभव आवश्यक है। दोनों पाठ्यक्रमों में कुल 390 घंटे का प्रशिक्षण होगा और प्रतिदिन तीन घंटे कक्षाएं लगेंगी। आवेदन के लिए उम्मीदवारों को विज्ञापन में दिए क्यूआर कोड से आवेदन फॉर्म भरकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
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यह युवा होंगे पात्र
योजना के तहत मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के पात्र युवा आवेदन कर सकते हैं। कार्यक्रम में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो अलग-अलग कौशलों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। साइट सर्वे पाठ्यक्रम में सौर परियोजनाओं के लिए सर्वे से जुड़े तकनीकी काम की जानकारी दी जाएगी जबकि मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग पाठ्यक्रम में सौर पैनल निर्माण से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर रहेगा। इससे युवाओं को तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में काम के लिए जरूरी तकनीकी दक्षता हासिल करने का अवसर मिलेगा।