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बंजार की दुर्घटनाग्रस्त हुई बस के मालिक को बचा रहे मंत्री: राठौर
Mon, 24 Jun 2019 06:20 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 24 Jun 2019 06:20 PM IST
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने आरोप लगाया कि परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर बंजार में दुर्घटनाग्रस्त हुई बस के मालिक को बचा रहे हैं। वह नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दें। जब मंत्री क्लीन चिट दे चुके हैं तो फिर जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।
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सरकार बताए कि नूरपुर बस हादसे की जांच रिपोर्ट का क्या हुआ? उन्होंने पार्टी के निष्क्रिय पदाधिकारियों को पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा। हाईकमान जो आदेश देगा, उसका सख्ती से पालन किया जाएगा। विधानसभा उपचुनाव से पहले पच्छाद ब्लॉक कांग्रेस की बैठक 30 जून को है।
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धर्मशाला में भी शीघ्र ब्लॉक कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। राठौर ने राजीव भवन में प्रेस सम्मेलन में कहा कि पिछले कांग्रेस कार्यालय में मारपीट मामले में दोषियों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए।
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हाईकमान के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी
सोशल मीडिया में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने वाले नेताओं के खिलाफ जांच कमेटी की रिपोर्ट को अनुशासन समिति ने सही पाया है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ हाईकमान के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कहा कि बंजार में जहां बस हादसा हुआ, वहां सड़क की हालत खस्ता है। बस भी खटारा और ओवरलोड थी। 42 सीटर बस में 80 सवारियां भरी थीं और 45 की मौत हुई। एचआरटीसी की जेएनएनयूआरएम की 317 और 25 इलेक्ट्रिक नई बसें रूटों पर नहीं उतारी गई हैं।
जहां बसें कम हैं और सवारियां ज्यादा हैं, क्यों बसें नहीं चलाई गईं। ब्लॉक स्पॉट में क्रैश बैरियर लगाए जाएं। सेब फसल पर स्कैब के रोग लगा है और सरकार बागवानों को सस्ती फफूंदनाशक दवाएं उपलब्ध कराए।
कहा कि बंजार में जहां बस हादसा हुआ, वहां सड़क की हालत खस्ता है। बस भी खटारा और ओवरलोड थी। 42 सीटर बस में 80 सवारियां भरी थीं और 45 की मौत हुई। एचआरटीसी की जेएनएनयूआरएम की 317 और 25 इलेक्ट्रिक नई बसें रूटों पर नहीं उतारी गई हैं।
जहां बसें कम हैं और सवारियां ज्यादा हैं, क्यों बसें नहीं चलाई गईं। ब्लॉक स्पॉट में क्रैश बैरियर लगाए जाएं। सेब फसल पर स्कैब के रोग लगा है और सरकार बागवानों को सस्ती फफूंदनाशक दवाएं उपलब्ध कराए।