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कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद जरूरी: डॉ. मारकंडा
अमर उजाला ब्यूरो, कुल्लू
Updated Mon, 09 Apr 2018 10:07 AM IST
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प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वित्त वर्ष 32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों की आय दोगुना करने के सरकार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद जरूरी है। यह कहना है कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा का। वह रविवार को शमशी में 61वीं वार्षिक कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
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भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना और चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पहाड़ी कृषि अनुसंधान एवं प्रसार केंद्र बजौरा के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन किया गया। तीन दिवसीय कार्यशाला में 25 राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों-बागवानों को रसायनिक खादों व कीटनाशकों के दुष्प्रभावों की जानकारी दें, जिससे जैविक खेती को अपनाने के लिए तैयार हो सकें।
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उन्होंने देश के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों की पांच पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। उन्होंने मक्की पर व्यापक शोध करने वाले पूर्व वैज्ञानिकों डा. एसके भल्ला और डा. बीके शर्मा को सम्मानित किया। कृषि मंत्री का स्वागत करते हुए कृषि विवि पालमपुर के कुलपति अशोक कुमार सरियाल ने विवि के अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी।
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कृषि मंत्रालय के कृषि आयुक्त एसके मल्होत्रा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों को एकीकृत बीज विकास केंद्रों से जोड़ा जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अतिरिक्त महानिदेशक डा. आईएस सोलंकी और भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान लुधियाना के निदेशक सुजय रक्षित ने मक्की के संबंध में किए जा रहे शोध कार्यों का ब्योरा दिया।
इस मौके पर बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी, द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर, कृषि विवि के अनुसंधान निदेशक डा. आरएस जम्वाल, कृषि विभाग के निदेशक देशराज शर्मा, पहाड़ी कृषि अनुसंधान एवं प्रसार केंद्र बजौरा के एसोसिएट डायरेक्टर डा. डीआर ठाकुर, कृषि विवि के प्रसार निदेशक डा. अतुल और अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।