स्कूलों में मिड डे मील को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल में मिलने वाले मिड डे मील की अब हर महीने जांच होगी। केंद्र सरकार ने मिड डे मील नियम 2015 को अधिसूचित कर दिया है। राज्यों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच करवानी होगी। भोजन की गुणवत्ता और पोषकता मानक सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है।
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके हुए मिड डे मील (मध्याह्न भोजन) को सरकार के खाद्य शोध प्रयोगशालाओं या मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं द्वारा मूल्यांकन व प्रमाणित किया जाएगा। नए नियम के तहत अगर मिड डे मील का फंड खत्म हो गया हो, तो स्कूल किसी और मद के फंड का इस्तेमाल मिड डे मील के लिए कर सकता है।
मिड डे मील की जगह देना होगा भत्ता
केंद्र सरकार ने कहा कि यदि बच्चों को मिड डे मील नहीं दिया जा सकता, तो स्कूल द्वारा उन्हें भत्ता दिया जाएगा। ये उपाय मिड डे मील के नियमों के हिस्सा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के हिस्से के तहत मिड डे मील प्रदान किया जाता है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्यों व संबंधित अन्य केंद्रीय मंत्रालयों से परामर्श के बाद 2013 के प्रावधान के तहत इन नियमों को अधिसूचित किया है। नियमों के अनुसार स्कूल जारी रहने के लगातार तीन दिनों तक अगर बच्चों को मिड डे मील नहीं प्रदान किया जाता है तो राज्य सरकार इसके लिए संबंधित व्यक्ति या एजेंसी को जिम्मेदार ठहराएगी।
कैलोरी, प्रोटीन का रखना होगा ध्यान
कक्षा पहली से आठवीं में पढ़ने वाले छह साल से 14 साल आयु वर्ग के विद्यार्थियों को मिड डे मील दिया जाएगा। प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को 450 कैलोरी व 12 ग्राम प्रोटीन क्षमता से युक्त गर्म पका खाना देना होगा। उच्चतर प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को 700 कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन क्षमता से युक्त गर्म पका मिड डे मील दिया जाएगा। मिड डे मील केवल स्कूल में ही दिया जाएगा।