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वार्डों की सीमाओं पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों में घमासान, स्थगित करना पड़ा सदन
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शिमला नगर निगम की मासिक बैठक में पार्षदों में तीखी नोंकझोंक हुई। इस दौरान कुछ समय के लिए सदन को स्?
- फोटो : SHIMLA CITY
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वार्डों की सीमाओं पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों में टकराव, स्थगित करना पड़ा सदन
यह हुआ
साल के आखिरी सदन में शब्दों की मर्यादा भूले पार्षद
गुस्से में मेयर की कुर्सी के पास पहुंची भराड़ी पार्षद
पार्षदों ने एक दूसरे को घुसपैठिए तक कह डाला
हंगामे के चलते कई सवालों पर नहीं हो पाई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में वार्डों की सीमाओं को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों में मंगलवार को जमकर बहसबाजी हुई। नगर निगम महापौर सत्या कौंडल की अध्यक्षता में हुए साल के आखिरी सदन में पार्षद शब्दों की मर्यादा भी भूल गए।
अफसरों के सामने पार्षद एक दूसरे को घुसपैठिया, ड्रामेबाज, स्टूपिड और बकवास जैसे शब्द कहने लगे। बवाल इतना बढ़ा कि मेयर को दोपहर दो बजकर 52 मिनट पर सदन दस मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। हंगामे की शुरुआत पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा के सवाल पर हुई। कहा कि कसुम्पटी पार्षद उनके वार्ड में आकर पार्किंग का काम करवा रहे हैं। यह घुसपैठ क्यों कर रहे हैं। इस पर कसुम्पटी पार्षद राकेश चौहान भड़क गए। बोले कि खुद तो तीन साल कोई काम नहीं करवाया। अब जब काम होने लगा तो परेशानी हो गई। कहा कि आपने तो मंत्री तक को नहीं छोड़ा। इनके कार्यक्रम में भी खूब ड्रामा करवाया। वहीं विकासनगर की पार्षद रचना ने पूर्व डिप्टी मेयर पर ही उनके वार्ड में घुसने का आरोप जड़ डाला। कहा कि पूर्व डिप्टी मेयर खुद दूसरों के वार्ड में घुस रहे हैं। इसी बीच बालूगंज पार्षद किरण बावा और मज्याठ पार्षद दिवाकर में भी स्ट्रीट लाइटों पर तीखी नोंकझोक हो गई। हंगामे के बीच सदन दस मिनट के लिए स्थगित किया गया।
स्ट्रीट लाइटों और सड़क बंद करने पर हंगामा
बालूगंज पार्षद किरण बावा ने दावा किया कि उनके डीओ पर चक्कर में लाइटें लगीं। लेकिन दूसरे पार्षद झूठा श्रेय ले रहे हैं। कहा कि मज्याठ पार्षद किस हैसियत से उनके वार्ड में काम करवा रहे हैं। पार्षद दिवाकर शर्मा ने कहा कि जब काम हो गया तो बालूगंज पार्षद श्रेय लेने आ गई। पहले कहां थी जब सदन ने इसे पास किया था। कहा कि यह लाइटें उन्होंने लगाई हैं। यह उनका वार्ड है। इसी बीच भराड़ी वार्ड में सड़क बंद करने पर हंगामा शुरू हो गया। स्थानीय पार्षद तनुजा चौधरी ने पूछा कि उन्हें बताए बिना पांच दिन क्यों सड़क बंद रखी गई। लोग परेशान हुए, इसका जिम्मेदार कौन है। पार्षद गुस्से में मेयर के पास पहुंच गई। पूछा कि जब आपको बुलाया था तो आप वार्ड में क्यों नहीं आए। आखिर कौन यहां काम करवा रहा है। वार्ड से मनोनीत पार्षद संजीव सूद ने कहा कि स्थानीय पार्षद को जनहित के काम होने से दिक्कत हो रही है। इस पर पार्षद भड़क गई और मनोनीत पार्षद को शटअप और स्टूपिड तक कह दिया। काफी देर बाद हंगामा शांत हुआ। इस दौरान अधिकारी मौन बैठे रहे।
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हंगामे के कारण जनता के मुद्दों पर चर्चा नहीं
सदन में हंगामे के चलते जनता से जुड़े कई सवालों पर चर्चा नहीं पाई। पार्षद शैली शर्मा, सिमी नंदा ने इस पर सवाल उठाए। कहा कि पार्षदों के हंगामे के चलते उनके सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इससे जनता को नुकसान होगा। हर पार्षद के बोलने और प्रस्ताव लगाने का समय तय किया जाए।
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यह हुआ
साल के आखिरी सदन में शब्दों की मर्यादा भूले पार्षद
गुस्से में मेयर की कुर्सी के पास पहुंची भराड़ी पार्षद
पार्षदों ने एक दूसरे को घुसपैठिए तक कह डाला
हंगामे के चलते कई सवालों पर नहीं हो पाई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में वार्डों की सीमाओं को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों में मंगलवार को जमकर बहसबाजी हुई। नगर निगम महापौर सत्या कौंडल की अध्यक्षता में हुए साल के आखिरी सदन में पार्षद शब्दों की मर्यादा भी भूल गए।
अफसरों के सामने पार्षद एक दूसरे को घुसपैठिया, ड्रामेबाज, स्टूपिड और बकवास जैसे शब्द कहने लगे। बवाल इतना बढ़ा कि मेयर को दोपहर दो बजकर 52 मिनट पर सदन दस मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। हंगामे की शुरुआत पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा के सवाल पर हुई। कहा कि कसुम्पटी पार्षद उनके वार्ड में आकर पार्किंग का काम करवा रहे हैं। यह घुसपैठ क्यों कर रहे हैं। इस पर कसुम्पटी पार्षद राकेश चौहान भड़क गए। बोले कि खुद तो तीन साल कोई काम नहीं करवाया। अब जब काम होने लगा तो परेशानी हो गई। कहा कि आपने तो मंत्री तक को नहीं छोड़ा। इनके कार्यक्रम में भी खूब ड्रामा करवाया। वहीं विकासनगर की पार्षद रचना ने पूर्व डिप्टी मेयर पर ही उनके वार्ड में घुसने का आरोप जड़ डाला। कहा कि पूर्व डिप्टी मेयर खुद दूसरों के वार्ड में घुस रहे हैं। इसी बीच बालूगंज पार्षद किरण बावा और मज्याठ पार्षद दिवाकर में भी स्ट्रीट लाइटों पर तीखी नोंकझोक हो गई। हंगामे के बीच सदन दस मिनट के लिए स्थगित किया गया।
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स्ट्रीट लाइटों और सड़क बंद करने पर हंगामा
बालूगंज पार्षद किरण बावा ने दावा किया कि उनके डीओ पर चक्कर में लाइटें लगीं। लेकिन दूसरे पार्षद झूठा श्रेय ले रहे हैं। कहा कि मज्याठ पार्षद किस हैसियत से उनके वार्ड में काम करवा रहे हैं। पार्षद दिवाकर शर्मा ने कहा कि जब काम हो गया तो बालूगंज पार्षद श्रेय लेने आ गई। पहले कहां थी जब सदन ने इसे पास किया था। कहा कि यह लाइटें उन्होंने लगाई हैं। यह उनका वार्ड है। इसी बीच भराड़ी वार्ड में सड़क बंद करने पर हंगामा शुरू हो गया। स्थानीय पार्षद तनुजा चौधरी ने पूछा कि उन्हें बताए बिना पांच दिन क्यों सड़क बंद रखी गई। लोग परेशान हुए, इसका जिम्मेदार कौन है। पार्षद गुस्से में मेयर के पास पहुंच गई। पूछा कि जब आपको बुलाया था तो आप वार्ड में क्यों नहीं आए। आखिर कौन यहां काम करवा रहा है। वार्ड से मनोनीत पार्षद संजीव सूद ने कहा कि स्थानीय पार्षद को जनहित के काम होने से दिक्कत हो रही है। इस पर पार्षद भड़क गई और मनोनीत पार्षद को शटअप और स्टूपिड तक कह दिया। काफी देर बाद हंगामा शांत हुआ। इस दौरान अधिकारी मौन बैठे रहे।
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हंगामे के कारण जनता के मुद्दों पर चर्चा नहीं
सदन में हंगामे के चलते जनता से जुड़े कई सवालों पर चर्चा नहीं पाई। पार्षद शैली शर्मा, सिमी नंदा ने इस पर सवाल उठाए। कहा कि पार्षदों के हंगामे के चलते उनके सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इससे जनता को नुकसान होगा। हर पार्षद के बोलने और प्रस्ताव लगाने का समय तय किया जाए।