इस शहर में पीजी संचालकों को अब महंगा मिलेगा पानी, टैक्स भी बढ़ेगा
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अगर आप पीजी का संचालन कर रहे हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ लिजिए। क्योंकि पीजी का संचानल महंगा होने वाला है जिसका बोझ आपकी जेब पर पड़ेगा। जी हां शहर में सैकड़ों पीजी संचालकों पर नगर निगम का डंडा चलने वाला है।
घरेलू उपभोक्ता बनकर सस्ती दरों पर पानी और गारबेज कलेक्शन की सुविधाएं लेकर निगम को धोखा दे रहे इन संचालकों से अब व्यावसायिक दरों पर शुल्क वसूला जाएगा। नगर निगम ने एक प्रस्ताव तैयार कर इनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
इसके तहत सभी पीजी संचालकों से अब व्यावसायिक दरों पर पानी के बिल वसूले जाएंगे। साथ ही टैक्स भी कामर्शियल दरों पर लिया जाएगा। अभी तक ज्यादातर पीजी संचालक घरेलू कनेक्शन लेकर सस्ती दरों पर ही निगम का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
गारबेज कलेक्शन का शुल्क भी बढ़ेगा
इससे हर साल नगर निगम को लाखों का चूना लग रहा है। निगम से पीजी चलाने की जानकारी छिपाकर टैक्स भी कम दे रहे हैं। कई जगहों पर दो से तीन कमरों में पीजी चल रहे हैं, लेकिन संचालक इसकी जानकारी निगम को नहीं देते।
शहरभर में वर्तमान में ऐसे पीजी की संख्या एक हजार से अधिक बताई जा रही है। नगर निगम के पास करीब 90 पीजी संचालक ही ऐसे हैं जो नियमों के अनुसार व्यावसायिक दरों पर पानी और टैक्स भरते हैं। निगम अब हर वार्ड में चल रहे पीजी का रिकॉर्ड तैयार करेगा और इन पर नए नियम लागू करेगा।
पीजी संचालकों को अब व्यावसायिक दरों पर गारबेज कलेक्शन का शुल्क चुकाना होगा। अभी तक ये घरेलू दरों पर प्रतिमाह महज 50 रुपये शुल्क जमा करवाते थे। लेकिन अब इन्हें गेस्ट हाउस की तर्ज पर 500 रुपये प्रतिमाह शुल्क देना होगा।
डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन करने वाले कर्मचारी नियमित तौर पर इसकी शिकायत भी करते हैं। कर्मचारियों के अनुसार कई भवनों जिनमें पीजी चल रहे हैं, उनमें रोजाना कूड़े के कई डस्टबीन उठाने पड़ते हैं। लेकिन शुल्क महज 50 ही वसूला जाता है।
नगर निगम हाउस में हो चुका हंगामा
शहर में अवैध रूप से चल रहे पीजी को लेकर नगर निगम की मासिक बैठक में भी हंगामा हो चुका है। पिछली बैठक में पार्षदों ने सवाल उठाए थे कि आखिर पीजी संचालकों को सस्ती दरों पर बिजली, पानी और गारबेज कलेक्शन की सुविधाएं क्यों दी जा रही है?
निगम ने इस मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया था। अब इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। मेयर कुसुम सदरेट का कहना है कि गलत तरीके से चलाए जा रहे पीजी को कामर्शियल रेट पर पानी बिल, गारबेज कलेक्शन शुल्क और टैक्स देना होगा।
शहर में महंगे हो सकते हैं पीजी
नगर निगम यदि नए नियम लागू करता है तो शहर में पीजी के रेट और बढ़ सकते हैं। वर्तमान में शहर में पीजी संचालक छात्रों और नौकरीपेशा लोगों से 6 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक प्रतिमाह वसूली करते हैं। ज्यादातर पीजी बस स्टैंड, संजौली, ढली, न्यू शिमला, खलीणी, चौड़ा मैदान, समरहिल, बालूगंज, कसुम्पटी, छोटा शिमला समेत कॉलेजों, यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाकों में चल रहे हैं। व्यावसायिक दरों पर पानी, टैक्स और गारबेज शुल्क चुकाने का बोझ ये पीजी में ठहरने वाले लोगों पर ही डाल सकते हैं।