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MC SHIMLA: कूड़े की फीस में कर डाला लाखों का घोटाला
अशोक चौहान, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 26 Mar 2018 01:54 PM IST
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नगर निगम के डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन शुल्क में लाखों के घोटाले की आशंका है। फीस वसूली के बाद लाखों रुपये कहां गायब हो गए। इसका निगम को भी पता नहीं। मामला सामने आने के बाद आननफानन में निगम ने जांच के लिए फील्ड में अधिकारी उतार दिए हैं।
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शुल्क दोगुना करने के बावजूद नगर निगम की कमाई बढ़ने की बजाय घट गई। शुल्क बढ़ाने के बाद निगम को करीब 40 लाख मिलने थे लेकिन मिले सिर्फ 22 लाख। लाखों की रकम कौन डकार गया। यह जांच का विषय है। इस मामले में भी नगर निगम के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं।
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नगर निगम शहर के करीब 39 हजार घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं से यह शुल्क वसूलता है। आंकड़ों के अनुसार पहले नगर निगम को हर महीने डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन से 28 लाख रुपये की आय हो रही थी। जनवरी माह में निगम प्रशासन ने शुल्क बढ़ा दिए। घरेलू उपभोक्ताओं का शुल्क जहां 50 से 75 रुपये कर दिया।
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वहीं, व्यावसायिक संस्थानों का शुल्क दोगुना कर दिया गया। निगम को उम्मीद थी कि कमाई का आंकड़ा 28 से 40 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमाई बढ़ने की बजाय घट गई। फरवरी में नगर निगम महज 22 लाख रुपये शुल्क ही वसूल पाया। बाकी 18 लाख रुपये कहां और किसके पास है, इसका जवाब खुद नगर निगम के पास नहीं है।
नगर निगम प्रशासन दे रहा यह तर्क
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एचआर ठाकुर की मानें कई लोगों ने चैक से भी भुगतान किया है। दो से तीन लाख रुपये चैक के तौर पर भी बैंक में जमा हुए हैं। लेकिन यदि इसे भी जोड़ लें तो आंकड़ा 25 लाख तक ही पहुंच पाता है।
इसके अलावा निगम का कहना है कि जनवरी में कई जगहों पर कर्मचारी नहीं गए। ऐसे में लोग शुल्क नहीं दे रहे हैं। कई लोग छुट्टी पर रहे। ऐसे में उनसे वसूली नहीं हो पाई। लेकिन 18 लाख रुपये इन वजहों से ही अटक गए, ये किसी के गले नहीं उतर रहा।
गोलमाल जांचने फील्ड में उतारे अफसर
शुल्क वसूली का काम अब तक सैहब सोसायटी के सुपरवाइजर ही कर रहे थे, लेकिन वसूली में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थी। अब कमाई में इतना बड़ा अंतर आने के बाद निगम आयुक्त ने अपने अफसरों को ही फील्ड में उतार दिया है।
सभी 34 वार्डों के लिए 34 नोडल अफसर तैनात किए गए हैं। ये सभी अफसर घरों और व्यावसायिक संस्थानों में जाकर रसीदें चैक कर रहे हैं। इनका रिकॉर्ड बाकायदा सैहब सोसायटी के रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। शनिवार को भी मालरोड पर निगम की एक टीम ने सभी दुकानों और होटलों की रसीदें चैक की हैं।
अनुमान के मुताबिक नहीं बढ़ी आय
डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन से जनवरी माह में जितनी आय होनी चाहिए थी, वह नहीं हो पाई है। इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। अब इस महीने देखेंगे कि आखिर कुल कितनी आय बढ़ जाएगी। - रोहित जमवाल, नगर निगम आयुक्त
महापौर कुसुम सदरेट से सीधे सवाल
सवाल: पंपिंग 43 एमएलडी की होती है तो सप्लाई 37 की मिल रही है। ऐसा क्यों?
महापौर: संजौली में जिस मशीन से सप्लाई चैक होती है, वह फिलहाल खराब है। इसीलिए यह अंतर आ रहा है।
सवाल: शहर को 45 एमएलडी की जरूरत होती है। रोज 35 से 40 एमएलडी मिल भी रहा है। फिर भी कई इलाकों में तीसरे चौथे दिन पानी क्यों दिया जा रहा है?
महापौर: तीसरे दिन लोगों को रूटीन से ज्यादा देर तक सप्लाई दे रहे हैं। कई बार सप्लाई घटने पर वितरण व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। लेकिन अब सभी को तीसरे दिन पानी दे रहे हैं।
सवाल: रोज करीब दस एमएलडी पानी का गोलमाल हो रहा है। होटलों को ज्यादा सप्लाई देने के भी आरोप हैं।
महापौर: इस बारे में अधिकारियों से बात करुंगी कि कितना पानी मिल रहा है और कैसे इसे वितरित किया जा रहा है। होटल वालों को बाकी लोगों की तरह ही सप्लाई दे रहे हैं।
पानी आवंटन में गड़बड़झाला
शहर में पानी आवंटन में गड़बड़झाला हो रहा है। शहर तक पानी की सप्लाई पहुंचते-पहुंचते करीब पांच एमएलडी पानी गायब हो जा रहा है। निगम का इसके पीछे तर्क है कि लीकेज से ऐसा हो रहा है, बावजूद रोजाना 35 से 40 एमएलडी पानी की सप्लाई के बाद भी जल संकट होना नगर निगम पर सवाल खड़े कर रहा है।
यही नहीं जो सप्लाई पहुंच रही है, उसमें भी कई एमएलडी पानी का हिसाब ही नहीं है। खुद महापौर और उपमहापौर इस पर चुप्पी साधे बैठे हैं। हर बार इनका रटारटाया जवाब होता है कि व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। शहर में जल्द ही जल संकट दूर हो जाएगा।
एमसी के पूर्व महापौर सहित वर्तमान पार्षदों ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप हैं कि रोजाना दस से बारह एमएलडी पानी का गोलमाल हो रहा है। पंपिंग से लेकर शहर में पेयजल वितरण तक की नगर निगम की व्यवस्था कटघरे में आ गई है।
खुद नगर निगम मानता है कि शहर को रोजाना 42 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। पर्यटन सीजन और स्कूल खुलने के दौरान यह मांग 45 एमएलडी तक पहुंच जाती है। इन दिनों सभी वार्डों में तीसरे दिन पानी दिया जा रहा है।
यानि रोजाना आधे शहर को ही पानी मिल है। आधे शहर को पानी की सप्लाई देने के लिए 23 से 25 एमएलडी पानी चाहिए। जबकि परियोजनाओ से निगम को सप्लाई रोजाना 35 एमएलडी की मिल रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि रोज करीब दस से बारह एमएलडी पानी कहां जा रहा है। महापौर कुसुम सदरेट रोज बैठकें तो कर रही हैं, लेकिन इस गोलमाल पर खामोश हैं।
होटलों, रसूखदारों पर मेहरबानी कर रहा नगर निगम
शहर में पानी की राशनिंग हो चुकी है। हैरानी की बात है कि ज्यादातर होटलों ने अभी तक पानी के टैंकर मंगवाना शुरू नहीं किए हैं। इससे पता चलता है कि होटलों को पर्याप्त पानी दिया जा रहा है। पूर्व महापौर संजय चौहान का कहना है कि निगम होटलवालों और अपने चहेतों को भरपूर पानी दे रहा है।
यदि होटलों को भी बाकी शहरवासियों की तरह तीसरे दिन पानी देते तो आज शहर में कई टैंकर पानी ढो रहे होते। लेकिन ऐसा नहीं है। कहा कि पूर्व नगर निगम के कार्यकाल में शहर को 24 से 32 एमएलडी सप्लाई मिलती थी। इसीलिए हमने तीसरे दिन पानी देने की व्यवस्था बनाई थी। अब तो रोज 35 से 45 एमएलडी पानी मिलता है, लेकिन फिर भी कई इलाकों में चौथे और पांचवें दिन पानी दिया जा रहा है।
पंपिंग के बाद कहां जा रहा पांच एमएलडी पानी
शहर ही नहीं नगर निगम की पंपिंग और शहर को सप्लाई मिलने में भी पांच से सात एमएलडी का अंतर आ रहा है। सभी परियोजनाओं से रोजाना 42 से 45 एमएलडी पानी की पंपिंग हो रही है। लेकिन शहर में 35 से 37 एमएलडी पानी ही पहुंच रहा है। सवाल उठता है कि रोज पांच से सात एमएलडी पानी आखिर कहां जा रहा है।
निगम कहता है कि लीकेज में कुछ पानी बह जाता है। लेकिन कोटी बरांडी, गिरि समेत कई पाइपलाइनें बदली जा चुकी हैं। पार्षद दिवाकर देव शर्मा और शैली शर्मा का कहना है पंपिंग सामान्य है लेकिन शहर में फिर भी पेयजल संकट हो रहा है। वितरण में बड़ी गड़बड़ी हो रही है जिसे लेकर सदन में प्रशासन से जवाब तलब किया जाएगा।
शहर को मिला 38.76 एमएलडी पानी
गिरि परियोजना में लीकेज के चलते लगातार दूसरे दिन रविवार को भी शहर के कई इलाकों पेयजल आपूर्ति प्रभावित रही। शहर के जिन इलाकों में सुबह पानी दिया जाना था, उन्हें देर शाम तक सप्लाई दी गई। सभी परियोजनाओं से शहर के लिए 38.76 एमएलडी पानी मिला है।