नगर निगम को वापस मिला टाउनहाल, सिर्फ मेयर-डिप्टी मेयर के होंगे दफ्तर
ऐतिहासिक टाउनहाल भवन आखिरकार नगर निगम को वापस मिल गया है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार को आदेश दिए कि वह टाउनहाल नगर निगम को हैंडओवर कर दे। मुख्य न्यायाधीश वी रामासुब्रमनियन और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि टाउनहाल में सिर्फ महापौर और उप महापौर के कार्यालय ही स्थापित किए जाएंगे। निगम आयुक्त समेत बाकी अधिकारियों को टाउनहाल में दफ्तर के लिए जगह की अनुमति नहीं दी गई है।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के दफ्तर टाउनहाल में शिफ्ट करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने आदेश दिए कि टाउनहाल में मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यालयों के अलावा बाकी बचे स्थान के इस्तेमाल को लेकर नगर निगम और सरकार मिलकर फैसला ले सकते हैं। खाली जगह को रीडिंग रूम जैसी सुविधाओं वाले हाई एंड कैफे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें सूचना केंद्र, पारंपरिक आर्ट एंड क्राफ्ट के लिए सेंटर जैसी सुविधाएं भी दी जा सकती है। निगम टाउनहाल में एंट्री पर प्रवेश शुल्क भी ले सकता है। इससे निगम को आय होगी।
नहीं मिलेगा काउंसलर रूम सदन पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
टाउनहाल में पार्षदों के बैठने के लिए अलग कमरा नहीं मिलेगा। मासिक बैठक करवाने के लिए हॉल मिलेगा या नहीं, अभी इस पर भी असमंजस है। निगम प्रशासन का कहना है कि टाउनहाल में सदन करवाने के लिए सरकार से बात की जाएगी। कोर्ट के फैसले के बाद अब सरकार इसे हैंडओवर करने की तारीख तय करेगी। हालांकि, निगम प्रयास कर रहा है कि इसी महीने मेयर और डिप्टी मेयर के दफ्तर इस भवन में शिफ्ट हो जाएं।
जानिए कब क्या हुआ था
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1908 में बने इस ऐतिहासिक भवन में 2014 तक टाउनहाल भवन में नगर निगम कार्यालय चल रहा था। इस दौरान सरकार ने इस भवन के जीर्णोद्धार का फैसला लिया। तत्कालीन मेयर के विरोध के बावजूद टाउनहाल खाली करवाया गया और एमसी के सारे दफ्तर उपायुक्त कार्यालय परिसर में शिफ्ट कर दिए।
इसके बाद एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से जारी आठ करोड़ रुपये से पर्यटन विभाग ने इसके जीर्णोद्घार का काम शुरू किया। यह काम 2017 तक पूरा होना था, लेकिन देरी के चलते यह काम अगस्त 2018 में जाकर पूरा हुआ। इसके बाद कई सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई कि इस ऐतिहासिक भवन में सरकारी दफ्तर खोलने की जगह इसका बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
कोर्ट ने सरकार से इसका प्लान देने को कहा। पहले प्लान रिजेक्ट भी हुआ। सरकार ने संशोधित प्लान भेजा, जिसमें मेयर-डिप्टी मेयर और आयुक्त के कार्यालय स्थापित करने की मांग की गई। साथ ही कैफे, सूचना केंद्र जैसे भी विकल्प दिए। शुक्रवार को कोर्ट ने इस पर अंतिम फैसला दे दिया।