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पानी न मिलने के मामले में सरकार और नगर निगम आमने सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 06 May 2016 12:01 AM IST
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शिमला के लोगों को प्राप्त पानी न मिलने के मामले में प्रदेश सरकार और नगर निगम शिमला आमने आमने आ गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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शिमला के लोगों को प्राप्त पानी न मिलने के मामले में प्रदेश सरकार और नगर निगम शिमला आमने आमने आ गए हैं। नगर निगम ने सरकार सरकार द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष रखे तथ्यों को सिरे से नकारते हुए आईपीएच विभाग के मुख्य अभियंता के आरोपों पर अपना स्पष्टीकरण पेश किया।
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नगर निगम आयुक्त पंकज राय के हल्फनामें में विभाग के लीकेज और असमान वितरण के आरोपों को नकारते हुए कहा कि नगर निगम शिमला ट्रायल के तौर पर पानी वितरण का कार्य आईपीएच विभाग को सौंपने को तैयार है। निगम का कहना है कि उसका उदेश्य शहरवासियों को प्राप्त पानी उपलब्ध कराने का है।
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यदि विभाग समझता है कि वह निगम को आवश्यकतानुसार पानी उपलब्ध करा रहा है और निगम की खराब वितरण प्रणाली के कारण प्राप्त पानी नहीं दे पा रहा है तो ऐसे सूरत में वह चाहेगा कि विभाग खुद पानी का वितरण शहरवासियों को करे। निगम ने माना कि उसे 30 से 35 एमएलडी पानी रोजाना औसतन मिल रहा है।
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निगम ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह स्वयं ही कन्फ्यूज है कि वह शहरवासियों को वास्तव में कितना पानी रोजाना मिलना चाहिए। एक तरह तो सरकार ने वर्ष 2013 में एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर शिमला के लिए 42 से 46 एमएलडी पानी की आवश्यकता की बात कही थी अब हाईकोर्ट में शपथ पत्र के माध्यम से बताया जा रहा है कि शहरवासियों को 35 एमएलडी पानी प्राप्त है जो निगम को रोजाना उपलब्ध कराया जा रहा है।
निगम का कहना है कि सरकार यदि यह समझती है कि 33.5 एमएलडी पानी निगम के लिए प्राप्त है तो क्यों कोटी बरांडी और बिननाला से पानी लिफ्ट करने पर जोर दे रहा है। निगम ने लीकेज को स्वीकारते हुए कहा है कि पानी वितरण नेटवर्क बहुत पुराना होने के कारण इसमें इस तरह की समस्या बनी रहती है। लेकिन निगम तुरंत कार्यवाही कर इसे प्लग या रिपेयर कर देता है। यह कोशिश कर रहा है कि सभी को बराबर व प्रर्याप्त पानी मिले।
निगम ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने कोर्ट के समक्ष सही तथ्य नहीं रखे। निगम ने बताया कि उसे रोजाना 3 एमएलडी पानी हाईडेंट के लिए और 2.5 एमएलडी शहर से बाहर के बाशिंदों के लिए रखना पड़ता है। पानी के समान वितरण के लिए निगम ने सभी 25 वार्डों में मौजूदा कर्मियों के अतिरिक्त नोडल आफिसर नियुक्त किए है जो समान पानी के वितरण पर नजर रखेंगे।
कसुम्पटी व टुटू क्षेत्रों को पर्याप्त पानी न देने पाने के आरोप पर स्पष्टीकरण देते हुए निगम ने बताया कि विभाग की ओर से बिछाई गई लाइन निगम की लाइन से नहीं जोड़ी गई है। निगम दो शर्तों पर लाइन को अपने अधीन लेने को तैयार है। इसमें नई लाइन को निगम की लाइन से जोड़ा जाना और विभाग उन सभी उपभोक्ताओं की फाइल निगम को सौंपे जिन्हें विभाग ने पानी के कनेक्शन जारी कर रखे हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सरकारी विभागों के अलावा उपभोक्ताओं को 33.5 एमएलडी पानी प्रर्याप्त नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पानी वितरण का समय निगम के कीमैन की मर्जी पर निर्भर है। की मैन की मर्जी का आलम यह है कि कहीं पानी 2 से 3 बजे रात को आना शुरू हो जाता है तो कहीं कई दिनों बाद लोगों को पानी मिलता है। कोर्ट ने निगम और आईपीएच को निर्देश दिए कि वह 17 गई तक बताए कि कीमैन के कार्यों पर नजर रखने के लिए क्या प्रणाली तैयार की है।