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शिमला में पेयजल संकट के लिए अफसर नहीं, मौसम था जिम्मेदार

Thu, 23 Aug 2018 01:29 PM IST
अशोक चौहान, अमर उजाला, शिमला
अशोक चौहान, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 23 Aug 2018 01:29 PM IST
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mc Inquiry report said cause of the water crisis in shimla was drought

दो बाल्टी पानी के लिए शहरवासियों को माल रोड तक पर लाइनें लगाने के लिए मजबूर करने वाला नगर निगम अब अपने अफसरों को बचाने में जुटा है। जल संकट को लेकर निगम ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें एमसी ने खुद को क्लीन चिट दी है।

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सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में निगम ने अपने किसी भी अफसर या कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं माना है। जल संकट के लिए सिर्फ मौसम और जलस्तर घटने को बड़ा कारण बताया गया है।
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अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने इसकी रिपोर्ट निगम आयुक्त को सौंप दी है।मई और जून के दौरान शिमला में भीषण पेयजल संकट पैदा हो गया था। शहरवासियों को पानी की बूंद-बूंद को तरसना पड़ा था।
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रोजाना करीब 20 एमएलडी पानी की सप्लाई मिलने के बावजूद शहर के कई इलाकों में आठ से दस दिन बाद पानी दिया गया। हालात ऐसे बिगड़े कि रिज और माल रोड पर भी पानी के लिए लाइनें लग र्गइं। पंपिंग से लेकर पेयजल वितरण में निगम फेल रहा।

अधीक्षण अभियंता को दिया था जांच का जिम्मा

mc Inquiry report said cause of the water crisis in shimla was drought

बाद में हाईकोर्ट और सरकार ने जब व्यवस्था संभाली तो जनता को राहत मिली। लेकिन अब जब लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात आई तो निगम ने मौसम को ही संकट का कारण करार दे दिया।

प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम को जल संकट के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। निगम आयुक्त ने अधीक्षण अभियंता को जांच का जिम्मा सौंपा। अधीक्षण अभियंता ने रिपोर्ट तैयार कर अब निगम आयुक्त को सौंप दी है।

लेकिन हैरानी की बात है कि इसमें निगम के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं माना गया है। निगम आयुक्त पंकज राय का कहना है कि मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है।

बड़ा सवाल, आखिर कौन है जिम्मेदार

mc Inquiry report said cause of the water crisis in shimla was drought

निगम की जांच के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर शहर में जल संकट के लिए कौन जिम्मेदार रहा। शहर को संकट के समय भी रोज करीब 18 से 20 एमएलडी पानी मिल रहा था।

ऐसे में निगम जनता को चौथे और पांचवें दिन आसानी से पानी की सप्लाई दे सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई इलाकों में 10 से 12 दिन बाद पानी दिया गया। बाद में जब सरकार ने व्यवस्था संभाली तो अचानक इसी सप्लाई में जनता को चौथे दिन पानी मिलना शुरू हो गया।

इसी दौरान अधिशासी अभियंता बदले गए, तो अधीक्षण अभियंता को बिलासपुर से शिमला का जिम्मा दिया गया। ये पहले भी पेयजल व्यवस्था संभाल रहे थे। इनके आने से हालात सुधरे। लेकिन पंपिंग और वितरण में जो खामियां थीं, उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर एमसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

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