शिमला में पेयजल संकट के लिए अफसर नहीं, मौसम था जिम्मेदार
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दो बाल्टी पानी के लिए शहरवासियों को माल रोड तक पर लाइनें लगाने के लिए मजबूर करने वाला नगर निगम अब अपने अफसरों को बचाने में जुटा है। जल संकट को लेकर निगम ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें एमसी ने खुद को क्लीन चिट दी है।
सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में निगम ने अपने किसी भी अफसर या कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं माना है। जल संकट के लिए सिर्फ मौसम और जलस्तर घटने को बड़ा कारण बताया गया है।
अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने इसकी रिपोर्ट निगम आयुक्त को सौंप दी है।मई और जून के दौरान शिमला में भीषण पेयजल संकट पैदा हो गया था। शहरवासियों को पानी की बूंद-बूंद को तरसना पड़ा था।
रोजाना करीब 20 एमएलडी पानी की सप्लाई मिलने के बावजूद शहर के कई इलाकों में आठ से दस दिन बाद पानी दिया गया। हालात ऐसे बिगड़े कि रिज और माल रोड पर भी पानी के लिए लाइनें लग र्गइं। पंपिंग से लेकर पेयजल वितरण में निगम फेल रहा।
अधीक्षण अभियंता को दिया था जांच का जिम्मा
बाद में हाईकोर्ट और सरकार ने जब व्यवस्था संभाली तो जनता को राहत मिली। लेकिन अब जब लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात आई तो निगम ने मौसम को ही संकट का कारण करार दे दिया।
प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम को जल संकट के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। निगम आयुक्त ने अधीक्षण अभियंता को जांच का जिम्मा सौंपा। अधीक्षण अभियंता ने रिपोर्ट तैयार कर अब निगम आयुक्त को सौंप दी है।
लेकिन हैरानी की बात है कि इसमें निगम के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं माना गया है। निगम आयुक्त पंकज राय का कहना है कि मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है।
बड़ा सवाल, आखिर कौन है जिम्मेदार
निगम की जांच के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर शहर में जल संकट के लिए कौन जिम्मेदार रहा। शहर को संकट के समय भी रोज करीब 18 से 20 एमएलडी पानी मिल रहा था।
ऐसे में निगम जनता को चौथे और पांचवें दिन आसानी से पानी की सप्लाई दे सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई इलाकों में 10 से 12 दिन बाद पानी दिया गया। बाद में जब सरकार ने व्यवस्था संभाली तो अचानक इसी सप्लाई में जनता को चौथे दिन पानी मिलना शुरू हो गया।
इसी दौरान अधिशासी अभियंता बदले गए, तो अधीक्षण अभियंता को बिलासपुर से शिमला का जिम्मा दिया गया। ये पहले भी पेयजल व्यवस्था संभाल रहे थे। इनके आने से हालात सुधरे। लेकिन पंपिंग और वितरण में जो खामियां थीं, उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर एमसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।