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पूर्व मेयर-डिप्टी मेयर बोले- शिमला को हमने दिया ये खास तोहफा, याद रखेगी जनता
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 23 Jun 2017 08:52 AM IST
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नगर निगम के पूर्व मेयर संजय चौहान और डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि राजधानी शिमला को आज स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट मिल जाएगा। यह पिछले नगर निगम का शहर की जनता को सबसे बड़ा तोहफा होगा। निगम चुनाव के बाद पहली बार मीडिया से रूबरू हुए पूर्व मेयर, डिप्टी मेयर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का शहर को मिलना या न मिलना किसी राजनीतिक पार्टी की देन नहीं होगी।
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इसके लिए शहर के लाखों लोगों ने सर्वे में सहभागिता की और 1.16 हजार लोगों ने फीडबैक देकर और पुराने नगर निगम ने प्रोजेक्ट के लिए तय मानकों और शर्तों को पूरा किया है। इसमें आम जनता ने वोट देकर परिवहन व्यवस्था सुधारने, स्वच्छ पेयजल सहित कुल पांच प्राथमिकताएं गिनाई हैं। आम लोगों के हित की इस लड़ाई को न्यायालय तक लड़कर शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए हक दिलवाया।
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इसी के बूते शिमला को स्मार्ट सिटी के लिए नामित शहरों की सूची में न केवल शामिल किया बल्कि इसके लिए दिन रात एक कर शर्तों और अनिवार्य पात्रता को पूरा करवाने का कार्य किया। उन्होंने पूरी उम्मीद जताई उनकी यह मेहनत रंग लाएगी और शुक्रवार को शिमला भी देश के उन 14 शहरों में होगा, जिसे स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार से मिलेगा।
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अधूरे कार्य पूरे कर शहर की जनता को सुविधा दे अब नगर निगम
मेयर और डिप्टी मेयर ने कहा कि वर्तमान नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद पिछले नगर निगम के समय में कौल डेम से पेयजल लाने की बारह सौ करोड़ की मंजूर परियोजना को पूरा करवा लोगों को स्वच्छ पेयजल दिलवाने पर काम करेंगे। सीवरेज कनेक्टिविटी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि के लिए मंजूर चार सौ करोड़ के प्रोजेक्ट पर कार्य कर शहर के लोगों को बेहतरीन सुविधा के लिए भी कार्य होगा। इसकी उन्हें पूरी उम्मीद है।
कांग्रेस-भाजपा के कार्यकाल में हुई गिरि में गड़बड़ी
गिरि परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर विजिलेंस में केस दर्ज किए जाने का माकपा नेता और पूर्व मेयर संजय चौहान और डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर ने स्वागत किया है। दोनों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार अब इस मामले की तह तक जांच करवाए और 2007 से लेकर परियोजना निर्माण उसके बाद से लाइन मरम्मत को लेकर खेले जा रहे खेल का खुलासा करे। इसमें आम जनता के टैक्स के रूप में लिए गए करोड़ों रुपये का गोलमाल हुआ है।
चौहान ने कहा कि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार को जीरो टॉलरेंस की नीति में ही इसका खुलासा किया गया। 2007 से लेकर लगातार शहर में पीलिया फै ला। नवंबर 2015 में पीलिया के बढ़े मामलों के बाद पेयजल की जांच में पानी में वायरस पाया गया। उन्होंने अश्वनी खड्ड से सप्लाई बंद करवाई।
यदि पीलिया न फैलता तो दूषित पानी और गिरि परियोजना में राजनेताओं, अफसरशाही और ठेकेदारों के बीच मरम्मत के नाम पर चल रहे करोड़ों के गोलमाल के खेल का पता नहीं चलता। जुलाई 2016 में तब पता चला जब उन्होंने स्वयं परियोजना स्थल का दौरा किया। परियोेजना में घटिया स्तर की सामग्री, घटिया पाइप लाइन इस्तेमाल की गई। जिस पर विजिलेंस में शिकायत दर्ज की गई। कांग्रेस और भाजपा की सरकारों के कार्यकाल में यह गोलमाल हुआ है।
12 एमएलडी पानी लीकेज में हो रहा था बर्बाद
पूर्व मेयर का आरोप है कि बीस एमएलडी की इस परियोजना में प्रतिदिन दो करोड़ लीटर की क्षमता के बदले सिर्फ 80 लाख लीटर पानी ही शहर को मिल रहा था। शेष 1.20 करोड़ लीटर लीकेज में ही बर्बाद हो रहा था। लोगों की मानें तो शुरूआती दौर में ही घटिया पाइप ब्लॉस्ट हो गई थी। जिसकी मरम्मत लगातार होती रही और करोड़ों उस पर खर्च होते रहे।