पांच माह के बेटे के लिए तीन बार घर छुट्टी पर आए थे शहीद अनिल, शहादत पर हर आंख नम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच माह के बेटे ने अभी पिता को पहचानना भी शुरू नहीं किया था कि सिर से बाप का साया ही उठ गया। शहीद अनिल जसवाल के साथ ही बेटे दीक्षु के लिए देखे गए कई ख्वाब भी अब खत्म हो गए हैं। दो साल पहले ही अनिल की शादी हुई थी।
पत्नी श्वेता के अलावा पांच माह का बेटा भी है। अपने बेटे को देखने के लिए अनिल पांच माह में तीसरी बार छुट्टी पर घर आए थे और करीब 15 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे।
सोलहसिंगी धार के बेटे अनिल के शहीद होने से समूचे क्षेत्र में शोक की लहर है। शहीद का पार्थिव शरीर अभी तक गांव में नहीं पहुंचा है। परिवार में अभी तक पिता के अलावा किसी को खबर नहीं है कि उनका बेटा वतन के लिए शहीद हो गया है।
शहादत पर आंखें नम, जताया शोक
बुधवार को अनिल का अंतिम संस्कार हो सकता है। अनिल ने वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सरोह से जमा दो की परीक्षा पास की थी। वे वॉलीबाल के बेहतरीन खिलाड़ी थे और राज्य स्तर पर खेल चुके थे। 24 जुलाई 2013 को सेना की 13 जैक कोर में भर्ती हुए थे। वह जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में तैनात थे, जहां आतंकी मुठभेड़ में वतन पर कुर्बान हो गए।
अनिल की शहादत पर कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कंवर, सैनिक कल्याण विभाग के उपनिदेशक मेजर रघुवीर सिंह, कमांडेंट कुलदीप राणा, प्रदेश कांग्रेस सचिव विवेक शर्मा, देसराज मोदगिल, देशराज गौतम, रविंद्र फौजी, महेंद्र राणा, सतीश धीमान, डोहगी पंचायत के प्रधान केसर चंद, वार्ड पंच जीत कुमार शर्मा, रविंद्र बिंदू आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है और परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं।