फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Marriage in upper caste can't deny quota benefits: Himachal court

जॉब कोटे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Sat, 21 Jun 2014 07:41 PM IST
Updated Sat, 21 Jun 2014 07:41 PM IST
विज्ञापन
Marriage in upper caste can't deny quota benefits: Himachal court

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए कहा कि अगर कोई महिला या पुरुष अपर कास्ट में शादी कर लेते हैं तो उन्हें आरक्षण की सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे मामले में ओबीसी सर्टिफिकेट बेवजह रोकने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार पर दो लाख रुपये का जुर्माना किया है।

विज्ञापन


सबसे अहम बात यह कि कुल जुर्माने में एक लाख की रकम एसडीएम मंडी, राज्य लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सचिव से वसूल की जाएगी, जबकि एक लाख रुपये प्रदेश सरकार चुकता करेगी। नीतू की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने यह फैसला सुनाया है।
विज्ञापन

एसडीएम ने सर्टिफिकेट देने से किया था मना

Marriage in upper caste can't deny quota benefits: Himachal court

नीतू का जन्म ओबीसी परिवार में हुआ था। लोक सेवा आयोग की ओर से लेक्चरर पद के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे। जनवरी 2009 में इसकी परीक्षा हुई थी, जिसमें नीतू सफल रही थी। 28 अगस्त 2009 को साक्षात्कार दिया गया, लेकिन आयोग ने उसे नया ओबीसी सर्टिफिकेट पेश करने के लिए कहा गया।

नया सर्टिफिकेट लेने के लिए वह एसडीएम मंडी के पास आवेदन किया, लेकिन एसडीएम ने यह कहकर सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया कि उसे राजपूत परिवार में शादी कर ली है। ऐसे में नया सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता है।

इसके बाद नीतू ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी की है। साथ ही जुर्माने की रकम में से एक लाख रुपये नीतू को देने के लिए कहा है।

खाली रहेगी पोस्‍ट, मिलेगी नौकरी

Marriage in upper caste can't deny quota benefits: Himachal court

कोर्ट ने कहा कि नीतू पिछले पांच साल से बेवजह उस अधिकार के लिए परेशान हो रही है जिसकी वह हकदार है। क्या उसका कसूर सिर्फ इतना है कि उसने आरक्षित वर्ग के परिवार में जन्म लेकर अपर कास्ट के परिवार में शादी की।

नीतू ने अपनी याचिका में यह मांग भी की थी कि याचिका के अंतिम निपटारे तक ओबीसी वर्ग की एक पोस्ट खाली रखी जाए। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया है।

सरकार ने याचिका का विरोध सिर्फ इस आधार पर किया था कि प्रार्थी इंटरव्यू के वक्त ओबीसी सर्टिफिकेट नहीं दे सकी और उसने ओबीसी स्टेटस ऊंची जाति में शादी करके खो दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed