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खंगाला पंडोह डैम, नहीं मिले शव

Mon, 16 Jun 2014 12:20 PM IST
Updated Mon, 16 Jun 2014 12:20 PM IST
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Mandi Incident: search operations with beam sonar system but all in vain

ब्यास नदी का पानी रोक कर सर्च ऑपरेशन में नाकामी के बाद पंडोह डैम को खंगालने के बाद भी लापता छात्रों के शव नहीं मिल सके। रविवार को एनडीआरएफ ने भारतीय नौ सेना की सहायता से अत्याधुनिक तकनीक मल्टी वीम सोनार सिस्टम से पंडोह डैम में शवों की तलाश की।

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डैम के 5 किलोमीटर के दायरे में आधुनिक सिस्टम से घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन पशुओं के कंकालों के सिवा कुछ नहीं मिला। सोमवार को इस तकनीक से फिर पंडोह डैम को खंगाला जाएगा। इसी बीच, मंडी जिला प्रशासन ने पंडोह डैम से आगे शवों पर नजर रखने के लिए सभी थानों को अलर्ट कर दिया है।
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आठवें दिन भी कुछ हाथ नहीं लगा

Mandi Incident: search operations with beam sonar system but all in vain

लारजी प्रोजेक्ट से छोड़े पानी में बहे हैदराबाद के इंजीनियरिंग छात्रों की तलाश के लिए रविवार को आठवें दिन पंडोह डैम में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। दस करोड़ के मल्टी वीम सोनार सिस्टम को पानी में नीचे उतार कर शवों की तलाश की गई, लेकिन एक भी शव नहीं मिल पाया। इसके अलावा स्ट्रीट मैपर से भी शवों की तलाशी की गई।

हादसे के आठ दिन बाद भी अभी 8 ही छात्रों के शव मिले हैं, जबकि 16 छात्र और एक टूर लीडर अभी तक लापता हैं। इससे पहले शनिवार को ब्यास का पानी लारजी डैम में रोककर सूखी नदी में चले ऑपरेशन में भी कोई सफलता नहीं मिल पाई थी।

सिस्टम के तकनीकी विशेषज्ञ सुंदर राजू ने कहा कि पूरे बांध क्षेत्र में आधुनिक सिस्टम से तलाश की गई, लेकिन सिल्ट और पशुओं के कंकाल के सिवाय कुछ भी नहीं दिख रहा है। उपायुक्त मंडी देवेश कुमार का कहना है कि सोनार तकनीक से भी फिलहाल लापता छात्रों का कोई सुराग नहीं लग पाया है।

क्या है मल्टी वीम सोनार सिस्टम

Mandi Incident: search operations with beam sonar system but all in vain
केदारनाथ त्रासदी के बाद मल्टी वीम सोनार सिस्टम को पहली बार उत्तराखंड में शवों की तलाश के लिए प्रयोग में लाया गया था। जीएमआर ग्रुप की इस मशीन को दो माह पूर्व ही लंदन से खरीदा गया है। पहली बार यहां इसे प्रयोग में लाया गया। ये मशीन अकसर डिस्कवरी चैनल वाले समुद्र में सतही चीजों की तलाश के लिए प्रयोग में लाते हैं।

मंत्री और सांसद लौटने की तैयारी में
ब्यास नदी सूखा कर शव न मिलने पर रविवार को परिजनों की उम्मीदें सोनार तकनीकी पर टिकी हुई थीं, लेकिन इसमें भी कोई सफलता नहीं मिली। रविवार को कई बैठकों के बाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अधिकारियों, मंत्रियों, सांसद ने अब पैकअप की तैयारी कर ली है।
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