कुल्लू: मनाली-लेह मार्ग रिकॉर्ड समय में बहाल, 16 अप्रैल तक 15 हजार फीट ऊंचे शिंकुला दर्रा पहुंचेगा बीआरओ
बीआरओ की मशीनरी शिंकुला के करीब पहुंच गई है और अगले दो तीन दिन में मशीनें 15 हजार फीट ऊंचे शिंकुला दर्रा में पहुंच जाएंगी। इन दिनों मौसम खुला है और बीआरओ ने दारचा से लेकर शिंकुला तक करीब 39 किलोमीटर रोड से बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
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सामरिक मार्ग मनाली-लेह मार्ग को सीमा सड़क संगठन ने इस बार रिकॉर्ड समय में बहाल कर दिया है। अब कुंजुम दर्रा और शिंकुला दर्रा से बर्फ की चादर को हटाने का काम तेज कर दिया है। 16 अप्रैल को सामरिक महत्व का दूसरा मार्ग मनाली-दारचा-कारगिल वाया शिंकुला दर्रा भी बहाल होने की उम्मीद है। बीआरओ की मशीनरी शिंकुला के करीब पहुंच गई है और अगले दो तीन दिन में मशीनें 15 हजार फीट ऊंचे शिंकुला दर्रा में पहुंच जाएंगी। इन दिनों मौसम खुला है और बीआरओ ने दारचा से लेकर शिंकुला तक करीब 39 किलोमीटर रोड से बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। ऐसे में अब मनाली-लेह मार्ग के बाद शिंकुला के खुलने से जांस्कर घाटी भी मनाली से जाएगी।
दारचा से दूसरी तरफ जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले शिंकुला दर्रा के खुलने के दौरान बीआरओ के डीजी लेफ्टिलेंट जनरल राजीव चौधरी स्वयं मौजूद रहेंगे। इस मार्ग के बनने से मनाली से कारगिल की दूरी करीब 250 किमी कम हुई है। पहले मनाली से लेह होकर कारगिल जाने के लिए करीब 750 किलोमीटर का लंबा सफर करना पड़ता था,जो अब 500 किमी रह गया है। उधर, ग्रांफू-काजा को बहाल करने में भी बीआरओ का बर्फ हटाने का काम जारी है। इस मार्ग के भी इसी माह तक बहाल होने की उम्मीद है। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल शबरीश बाचली ने बताया कि बीआरओ की मशीनरी दारचा-शिंकुला और ग्रांफू-काजा मार्ग को खोलने में जुटी है। उन्होंने कहा कि शिंकुला दर्रा इसी सप्ताह तक बहाल हो जाएगा। बर्फ हटाने का काम जोरों से चला है।