मनाली-लेह मार्ग बहाल, पर्यटकों को करना होगा थोड़ा इंतजार
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बर्फ से लकदक तीन दर्रों को फतह कर करीब पांच महीने बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने सामरिक महत्व के 485 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग को सेना के लिए बहाल कर दिया है। 13050 फुट ऊंचे रोहतांग, 14500 फुट ऊंचे बारालाचा और 15000 फुट ऊंचे तंगलंगला दर्रों से 11 मई तक बर्फ हटा दी गई थी लेकिन बीआरओ ने आधिकारिक रूप से 13 मई को इस मार्ग को खोला है।
मनाली-लेह मार्ग खुल जाने से लद्दाख की अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना के लिए सबसे सुरक्षित मार्ग का विकल्प मिल गया है। अब सेना की सारी सप्लाई इसी रूट से होगी।
बीआरओ 38 टास्क फोर्स के कमांडर कर्नल एसके अवस्थी ने बताया कि इस बार मनाली-लेह सड़क को बीते साल के मुकाबले 21 दिन पहले खोला गया है। अमूमन जून अंत और जुलाई महीने में ही यह मार्ग बहाल हो पाता था। इस मिशन में सीमा सड़क संगठन के दीपक और हिमांक प्रोजेक्ट ने अपनी अहम भूमिका निभाई है।
पर्यटकों को करना होगा थोड़ा इंतजार
दिन के अलावा रात को वाहनों की रोशनी में भी बर्फ हटाने का अभियान जारी रहा। जवानों को समुद्रतल से 15 हजार फुट की ऊंचाई पर शून्य से 30 डिग्री तक तापमान का सामना करना पड़ा। कहीं-कहीं 15 से 25 फुट तक बर्फ की दीवारों को रास्ते से हटाना पड़ा है। लगातार खराब मौसम बीआरओ के लिए इस अभियान में सबसे बड़ी चुनौती बनी रही।
लाहौल स्पीति प्रशासन की टीम अब सड़क मार्ग का निरीक्षण कर सैलानियों को इस रूट पर वाहनों की आवाजाही के लिए हरी झंडी देगी। उपायुक्त लाहौल स्पीति अश्वनी कुमार चौधरी ने बताया कि सड़क निरीक्षण के बाद ही पर्यटकों को इस रूट से जाने की इजाजत दी जाएगी।