सुप्रीम कोर्ट से सीएम वीरभद्र सिंह को मिली बड़ी राहत
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सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को बड़ी राहत मिली है। बहुचर्चित सीडी मामले में अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एसएम कटवाल की याचिका हिमाचल हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने सीडी मामले में वीरभद्र सिंह को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर कटवाल की याचिका को मई 2015 में खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ कटवाल सुप्रीम कोर्ट गए थे।
कटवाल ने प्रदेश हाईकोर्ट में 24 दिसंबर 2012 के विशेष न्यायाधीश (वन) शिमला के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को बरी करने के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य सरकार ने इस मामले में कोई अपील दायर नहीं की है क्योंकि इसके प्रमुख वीरभद्र सिंह ही हैं और वे इस मामले में मुख्य आरोपी रहे हैं।
हाईकोर्ट ने इस आधार पर खारिज की थी याचिका
कटवाल ने याचिका में खुद को पीड़ित और डि-फैक्टो शिकायत कर्ता कहा था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि कटवाल पीड़ित नहीं हैं और उनका इस अपील को दायर करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह भी कहा गया कि याचिका के 96 दिन की देरी से दायर करने के भी पर्याप्त कारण नहीं हैं। इसी के साथ कटवाल की याचिका को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने की पुष्टि हिमाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता सूर्य नारायण सिंह ने की है।
क्या था सीडी मामला- विजिलेंस ब्यूरो ने वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह के खिलाफ बहुचर्चित सीडी मामला पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में दर्ज किया था। इसमें उन पर वर्ष 1989 में अवैध लेनदेन के आरोप लगाए गए थे। 24 दिसंबर 2012 को विशेष न्यायाधीश वन बीएल सोनी की अदालत ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया था।
कौन हैं कटवाल
पूर्व आईएएस अधिकारी एसएम कटवाल की मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ पुराना नाता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी माने जाने वाले कटवाल भाजपा सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। वर्ष 1998 में उन्हें हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड का सदस्य बनाया गया। उसके कुछ ही समय बाद उन्हें बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया।
बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए उन पर वीरभद्र सिंह ने चिटों पर भर्तियों के आरोप लगाए थे। 25 सितंबर, 2004 को कांगड़ा के नगरोटा सूरियां में कार्यकर्ताओं की बैठक में वीरभद्र सिंह ने प्रेम कुमार धूमल और एसएम कटवाल पर नौकरियां बेचने के आरोप लगाए थे। बाद में वीरभद्र सिंह के इस बयान के खिलाफ कटवाल ने 7 मार्च, 2005 को ऊना की अदालत में मानहानि का केस दायर किया था।