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चुनावी शोर में खेतों से गेहूं की फसल समेटने की टेंशन, कार्यकर्ता जुटाना बड़ी चुनौती

Sun, 28 Apr 2019 01:14 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 28 Apr 2019 01:14 PM IST
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lok sabha election 2019 wheat crop cutting season from 20th April to 25th May in Himachal Pradesh
- फोटो : अमर उजाला

हिमाचल के लोकसभा चुनाव प्रचार पर गेहूं की फसल भारी पड़ सकती है। प्रदेश में गेहूं की कटाई का सीजन शुरू हो गया है। 20 अप्रैल से 25 मई तक प्रदेश में गेहूं फसल की कटाई का काम चलता है। मई के दूसरे हफ्ते में कटाई का काम तेजी पकड़ेगा। इसी बीच प्रदेश में चुनाव प्रचार चरम पर रहेगा। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए रोड शो और जनसभाओं में आम जनता के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को जुटाना परेशानी भरा काम होगा।

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चुनाव शेड्यूल के अनुसार 29 अप्रैल तक सुबह 11 बजे से अपराह्न 3 बजे के बीच प्रत्याशी नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 30 अप्रैल को नामांकनों की छंटनी होगी। 2 मई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 19 मई को प्रदेश में मतदान होगा। 23 मई को मतों की गणना होगी। मई महीने के दौरान प्रदेश के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की कटाई का काम अपने चरम पर होगा। इसी दौरान चुनाव प्रचार भी तेजी पकड़ेगा।
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प्रदेश में कई राष्ट्रीय नेताओं की जनसभाएं होंगी। इन जनसभाओं में लोगों की भीड़ जुटाना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती भरा काम होगा। प्रदेश के चंगर क्षेत्रों में 20 अप्रैल से कटाई शुरू हो गई है। मई के पहले हफ्ते में इन क्षेत्रों में गेहूं की कटाई पूरी हो जाएगी। जिन क्षेत्रों में पानी लगता है वहां मई के पहले हफ्ते से गेहूं की कटाई शुरू होगी 20 मई तक चलेगी। ऐसे में लोगों को कटाई के काम से हटाकर चुनावी प्रचार में लगाना पार्टी नेताओं के लिए आसान नहीं रहने वाला है।

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गर्म मौसम में डोर टू डोर प्रचार में बहेगा पसीना

lok sabha election 2019 wheat crop cutting season from 20th April to 25th May in Himachal Pradesh

खेतों में गेहूं की कटाई में लगे मतदाताओं तक वोट अपील करने के लिए राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रत्याशियों में मई महीने के गर्म मौसम में डोर टू डोर प्रचार करने के लिए पसीना बहाना पड़ेगा। सुबह और शाम के समय अधिकांश लोग खेतों में व्यस्त होंगे। दोपहर के समय आराम करने के लिए लोग घरों में मिलेंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों को दोपहर के समय ही प्रचार को तेज करना पड़ेगा।

आठ जिलों में होती है गेहूं की पैदावार
प्रदेश के मैदानी जिलों कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर सहित मंडी, चंबा, सोलन, सिरमौर और शिमला व कुल्लू जिले के कुछ क्षेत्रों में गेहूं की फसल की पैदावार होती है। सूबे के कई क्षेत्रों में गेहूं की कटाई का काम शुरू हो गया है।

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