सुखराम की शांता कुमार से नहीं की जा सकती तुलना: जयराम
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लेकिन, शांता कुमार की तुलना सुखराम से कभी नहीं की जा सकती। शांता ने कभी परिवारवाद की राजनीति नहीं की, जबकि सुखराम राजनीति में हमेशा परिवार तक सीमित रहे। मुख्यमंत्री सुलह में भाजपा के ओबीसी मोर्चा के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
सीएम ने कहा कि सुखराम का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आना-जाना लगा रहा। विधानसभा चुनाव में सुखराम ने पहले बेटे लिए टिकट मांगा। फिर जीतने पर मंत्री पद और उसके बाद अब पोते के लिए टिकट मांग रहे थे।
वक्त आने पर सब बताया जाएगा
जब भाजपा ने उनके पोते को टिकट नहीं दिया तो वह कांग्रेस में शामिल हो गए। जयराम ने कहा कि वक्त आने पर सब बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस की बात को न तो कोई सुनने को तैयार है और न मानने को। प्रदेश की जनता भाजपा के पक्ष में मतदान करने का मन बना चुकी है।
इस मौके पर सांसद शांता कुमार, स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार, कांगड़ा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर, सरवीण चौधरी, विधायक रमेश धवाला, रवि धीमान, पूर्व विधायक दूलो राम, जिला भाजपा अध्यक्ष विनय शर्मा, त्रिलोक कपूर, कृपाल परमार, ओबीसी अध्यक्ष ओमप्रकाश मंडल अध्यक्ष देशराज शर्मा व कई लोग मौजूद रहे।
अनिल शर्मा बताएं वह किस पार्टी में हैं: शांता
भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने कहा कि अनिल शर्मा बताएं कि वह आज किस पार्टी में हैं। न तो वह भाजपा का प्रचार कर रहे हैं और न अभी कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं। भाजपा के मंत्री होते हुए भी उनका खामोश बैठे रहना हैरत में डालने वाला है। शांता ने कहा कि उन्होंने भले ही चुनावी राजनीति छोड़ दी है, लेकिन कार्यकर्ता के रूप में वह पार्टी के कार्य करते रहेंगे।
चादर को कभी मैला नहीं होने देंगे : परमार
सुलह के विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने शांता कुमार से कहा कि धौलाधार के बर्फ जैसी उनकी (शांता) राजनीति में सफेद चादर है। वैसे ही वह भी उनके विधानसभा क्षेत्र गंगोत्री (सुलह) के विकास को लेकर काम करेंगे और कभी भी अपनी सियासी सफेद चादर पर कोई दाग नहीं लगने देंगे।