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चुनावी मुद्दा: नेताओं को बस हादसों को मुद्दा बनाने की फुर्सत नहीं

Wed, 24 Apr 2019 01:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 24 Apr 2019 01:32 PM IST
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lok sabha election 2019 and bus accidents issue in himachal pradesh
सांकेतिक तस्वीर

वे घर से बताकर जाते हैं कि शाम को जल्दी घर लौट आएंगे, मगर वे लौटने के बजाय हमेशा के लिए इस संसार से ही विदा हो जाते हैं। हिमाचल में पता नहीं ऐसे कितने लोगों का समय से पहले ही बस दुर्घटनाओं में प्राणांत हो गया। इन हादसों से न जाने कितने ही मासूम बच्चे अनाथ हो गए, न जाने कितने घरों के चिराग बुझ गए, कितनी ही युवतियां विधवाएं बन गईं और कितनों ने ही अपने हमसफ र गंवा दिए।

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सरकारें मैजिस्ट्रीयल जांचें बैठाती हैं और जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक सबकुछ भुला दिया जाता है। चुनाव में गाली-गलौज और इसी तरह के अनावश्यक मुद्दों से लोगों का ध्यान भंग कर रहे राजनेताओं के पास इस मुद्दे पर बात करने की फु र्सत ही नजर नहीं आ रही है। मंगलवार को फिर चंबा में बस हादसा हुआ, जिसमें दर्जनों लोगों को चोटें आईं। 
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हिमाचल में हर साल तीन हजार से ज्यादा छोटे-बडे़ हादसे होते हैं। 800 से 1200 लोग सड़क हादसों में मरते हैं। पांच हजार से ज्यादा लोग इन हादसों में जख्मी होते हैं। कारों, छोटी गाड़ियों के खाइयों में गिरने का सिलसिला तो लगातार चला हुआ है। इनमें परिवार के परिवार खत्म हो रहे हैं। बीच-बीच में बड़े बस हादसे तो दिल दहला जाते हैं। एक झटके में 40 या 50 से ज्यादा तक लोग मरते रहे हैं। इन हादसों पर रोक नहीं लग पा रही है। बस दुर्घटनाएं हिमाचल प्रदेश का बहुत बड़ा मुद्दा है। यहां की खराब और तंग सड़कें इनका सबसे बड़ा कारण है। सभी सड़कों के किनारे पैरापिट नहीं लगे हैं।
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कितनी स्पीड में गाड़ियां चलानी हैं, इसके भी बोर्ड नहीं लगे हैं। शिमला से परवाणू, शिमला से मनाली आदि महत्वपूर्ण सडक मार्गों के भी यही हाल हैं। पुलिस भी केवल शहरी क्षेत्रों में ही लोगों की गाड़ियों के चालान काटने का टारगेट पूरा करती नजर आती है। खटारा बसों में सवारियों को बैठाया जाता है। परिवहन अधिकारी इनकी निगरानी करते नजर नहीं आते। रोड सेफ्टी कमेटी की भी हादसों के बाद ही बैठकें होती हैं।

हिमाचल में ये हुए बड़े बस हादसे

20 अप्रैल, 2017 : यात्रियों से भरी उत्तराखंड की ओवरलोड निजी बस शिमला के गुम्मा के निकट खाई में गिरी, 45 की मौत। 
5 नवंबर, 2016 : मंडी के बिंद्रावणी में ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत और 26 घायल। 
20 मई, 2016 : चंबा में बस हादसे में 14 मरे, 31 घायल। 
23 जुलाई, 2015 : कुल्लू में पार्वती नदी में गिरी बस, 31 लोग बहे। 
21 अगस्त, 2014 : किन्नौर के रुतरंग में बास्पा नदी में गिरी बस 23 की मौत, 20 घायल। 
27 सितंबर, 2013 : रेणुका में ददाहू-टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस गहरी खाई में गिरी। बस सवार सभी 21 लोगों की मौत। 
8 मई, 2013 : मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे। 
11 अगस्त, 2012 : चंबा-धुलाड़ा मार्ग पर गागला के पास ओवरलोड बस हादसा, 52 मरे। 

14 महीने की जयराम सरकार सड़कों की हालत नहीं समझ सकी है। प्रदेश की जनता को सपने दिखाती रही है। हिमाचल के नेशनल हाईवे और अन्य ग्रामीण सड़कों की हालत खराब है। जयराम सरकार सड़कों की मरम्मत करने में फेल रही है, जबकि सरकार ने आठ हजार करोड़ के ऋण लिए हैं। सड़क हादसे दुखद हैं। कांग्रेस इनको लेकर गंभीर रही है।  - नरेश चौहान, महासचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी

हादसे दुखद हैं। जयराम सरकार की प्राथमिकता ही सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य हैं। जयराम सरकार भी सड़क हादसों पर बहुत गंभीर है। भाजपा ने 69 हाईवे हिमाचल के लिए स्वीकृत करवाए हैं। इसका एक मकसद सुरक्षित परिवहन भी है। इनमें से 14 का शिलान्यास भी हो गए हैं। कांग्रेस ने घोषणापत्र में बोला था कि 2000 किलोमीटर नई सड़कें हर साल बनाएंगे, मगर सड़कों का रखरखाव तक नहीं किया। - प्रवीण शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा

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