चुनावी मुद्दा: सरकारों की अनदेखी से हजारों अनुबंध कर्मचारी नाराज
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हिमाचल में चुनावी समीकरण को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाने वाले मुलाजिमों के एक बड़े तबके को अपने अधिकारों के लिए कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विभिन्न विभागों में आठ से लेकर तीन साल का अनुबंध सेवाकाल पूरा कर नियमित हुए हजारों कर्मचारी बीते कई सालों से नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता लाभ देने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि बिना किसी वित्तीय लाभ के मांगी जा रही इस वरिष्ठता को देने में मौजूदा भाजपा सरकार व पूर्व की कांग्रेस सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। थक-हारकर कर्मचारियों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ रहा है।
कोर्ट सेे अनुबंध कर्मियों के पक्ष में आए वरिष्ठता लाभ के फैसलों को लेकर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली गजब है। सरकार सिर्फ कोर्ट में केस जीतकर आने वाले कर्मचारियों को ही वरिष्ठता लाभ दे रही है। बाकी ऐसे कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार के इस रवैये को लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है।
ठगा महसूस कर रहे कर्मचारी
प्रदेश के लगभग सभी विभागों में अनुबंध पर नियुक्तियां की गई हैं। धूमल सरकार ने 8 वर्ष के बाद नियमित करने की नीति को बदल कर 6 वर्ष किया था। पूर्व की कांग्रेस सरकार ने अनुबंध कर्मियों की मांग पर तीसरे बजट में अनुबंध कार्यकाल को 6 से 5 साल कर दिया।
अनुबंध कर्मियों का असंतोष जारी रहने पर कांग्रेस सरकार ने पंजाब की तर्ज पर पांच वर्ष का अनुबंध कार्यकाल कम कर तीन वर्ष कर दिया। सरकार के इस फैसले से अनुबंध कर्मियों के एक वर्ग को राहत मिली लेकिन आठ, छह और पांच वर्ष की अनुबंध अवधि पूरा करने के बाद नियमित हुए कर्मियों को कोई लाभ नहीं मिला।
छह से आठ वर्ष के अनुबंध कार्यकाल के बाद नियमित कर्मी - 10 हजार
पांच वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी करने के बाद नियमित कर्मी - 11 हजार
तीन वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी करने के बाद नियमित कर्मी - 8 हजार
निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को पूरा करने के बाद नियुक्त हुए अनुबंध कर्मियों को वरिष्ठता लाभ देने के लिए उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ने फैसले दिए हैं। सरकार को जल्द से जल्द अनुबंध कर्मियों को वरिष्ठता लाभ प्रदान कर सभी अनुबंध कर्मियों से न्याय करना चाहिए। अनुबंध नीति एक समान न होने के चलते बहुत से कर्मचारियों को एक समान सेवा लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। - राजेश वर्मा, हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ के पूर्व महासचिव
कांग्रेस सरकार ने ही अनुबंध कर्मचारियों को छह की जगह तीन साल के सेवाकाल के बाद नियमित करने का फैसला लिया था। पूर्व सरकार ने हजारों बेरोजगारों को अपने कार्यकाल के दौरान रोजगार के अवसर मुहैया करवाए। - रितेश कपरेट, प्रदेश सचिव, कांग्रेस
प्रदेश सरकार ने कर्मचारी वर्ग का पूरा ध्यान रखा है। अनुबंध अवधि को भी भाजपा सरकार ने ही कम करना शुरू किया था। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों को वित्तीय लाभ भी जारी किए हैं। इस मामले को लेकर भी जल्द फैसला होगा। - गणेश दत्त, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा