Lok Sabha Election: 1800 दृष्टिबाधित मतदाता बिना किसी सहारे के करेंगे मतदान
पोलिंग बूथ पर दृष्टिबाधित मतदाताओं को पीठासीन अधिकारी ब्रेललिपि प्रकाशित मार्गदर्शिका उपलब्ध करवाएंगे।
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1 जून को हिमाचल में होने वाले लोकसभा चुनाव में करीब 1800 दृष्टिबाधित मतदाता बिना किसी सहारे के मतदान करेंगे। पोलिंग बूथ पर दृष्टिबाधित मतदाताओं को पीठासीन अधिकारी ब्रेललिपि प्रकाशित मार्गदर्शिका उपलब्ध करवाएंगे। मार्गदर्शिका को ऊंगली के स्पर्श से पढ़ने का समय दिया जाएगा। मार्गदर्शिका में मतदाता को ईवीएम के जरिये मतदान की पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। ईवीएम मशीनों पर भी दाईं ओर ब्रेललिपि का विकल्प होगा जिसकी मदद से दृष्टिबाधित मतदाता अपने मनपंसद प्रत्याशी को आसानी से वोट दे सकेंगे। मतदान केंद्र पर शारीरिक रूप से विकलांग मतदाताओं को कतारों में खड़े नहीं रहना पड़ेगा। पोलिंग स्टेशन पर ऐसे मतदाताओं को सीधे पीठासीन अधिकारी से मिलना होगा। पीठासीन अधिकारी दृष्टिबाधित मतदाताओं का वोट प्राथमिकता के आधार पर डलवाएंगे। ऐसे मतदान केंद्र जहां दृष्टिबाधित मतदाता पंजीकृत हैं, वहां व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा भी मुहैया करवाई जाएगी।
पहले स्वजनों की मदद से मतदान करते थे दृष्टिबाधित
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही इस सुविधा से पहले दृष्टिबाधित मतदाताओं को सहारे की आवश्यकता पड़ती थी। पोलिंग बूथ के भीतर पीठासीन अधिकारी की अनुमति के बाद ऐसे मतदाताओं को उनके स्वजन ईवीएम मशीन वाले कैबिन में ले जाते थे। फिर उनसे उनकी पसंद के प्रत्याशी का नाम या फिर चुनाव चिह्न के बारे में पूछा जाता था। ये जिस उम्मीदवार या चुनाव चिह्न की जानकारी देते थे, सहायक उसी का बटन दबा दिया करते थे। चूंकि वे देख नहीं सकते थे, इसलिए उनका वोट गोपनीय न रहकर सार्वजनिक हो जाता था। जो भी सहायक वोट देने जाता था, उनको जानकारी हो जाती थी। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक पोलिंग बूथ में एक ब्रेललिपि प्रकाशित मार्गदर्शिका उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
दृष्टिबाधित मतदाताओं वाले मतदान केंद्र पर विशेष सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। ऐसे मतदाता ब्रेललिपि की मदद से मतदान करेंगे। इन्हें कतारों में खड़े नहीं होना होगा और व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा भी उपलब्ध होगी। - मनीष गर्ग, राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी
कृषि और बागवानी के लिए सिंचाई योजनाओं के निर्माण की जरूरत
सरकार की ओर से किसानों को विभिन्न लाभ दिए जाते हैं, जिसमें वार्षिक छह हजार रुपये देना, सब्सिडी पर बीज व खाद तथा कृषि उपकरण उपलब्ध कराना। लेकिन जब तक प्रत्येक कृषक और बागवान तक सिंचाई योजनाओं को नहीं पहुंचाया जाता, सब्सिडी वाले बीज भी बिना सिंचाई के समय से पहले ही सूख जाएंगे। अत: हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्र के दूर-दराज वाले गांवों में सिंचाई योजनाओं व ट्यूबवेल तथा चेकडैम को प्राथमिकता के आधार पर निर्मित किया जाना होगा। सभी सही अर्थों में योजनाओं का फायदा मिलेगा। इस प्रकार की योजनाओं को प्राथमिकता देने वाला उम्मीदवार ही सही मायनों में मेरे वोट का हकदार होगा। -सुभाष वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, कनलोग, शिमला