लगातार दूसरी बार निर्वासित तिब्बत सरकार के पीएम बने सांग्ये
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वर्ष 2011 में 14वें धर्मगुरु दलाईलामा की विरासत संभालने वाले डॉ. लोबसंग सांग्ये लोकतांत्रिक प्रणाली के जरिये लगातार दूसरी बार निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री चुन लिए गए हैं। दार्जिलिंग में जन्मे डा. लोबसंग ने अपने प्रतिद्वंद्वी निर्वासित तिब्बत सरकार के स्पीकर पेंपा सेरिंग को 9012 वोटों से हरा दिया।
भारत, अमेरिका, यूरोप, नेपाल, भूटान समेत दुनिया भर के देशों में 16वीं निर्वासित तिब्बत सरकार के चयन के लिए हुए मतदान के बाद बुधवार सुबह तिब्बत सरकार के मुख्य चुनाव आयुक्त छोफेल शोसुर ने चुनाव नतीजों में प्रधानमंत्री पद के लिए डा. लोबसंग सांग्ये को विजेता घोषित किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि दुनिया भर में करीब डेढ़ लाख तिब्बती निर्वासित रूप में रह रहे हैं। 90377 तिब्बती वोटरों का प्रधानमंत्री पद के चुनाव के लिए पंजीकरण किया गया था। इसमें से 59353 वोटरों ने मतदान किया। डा. लोबसंग सांग्ये को 33876 (57.08 फीसदी) और पेंपा सेरिंग को 24864 (41.89 फीसदी) वोट मिले।
चुनी गई 45 सदस्यीय संसद
प्रधानमंत्री के साथ 45 सदस्यीय 16वीं निर्वासित तिब्बत संसद भी चुन ली गई है। निर्वासित तिब्बत संसद में तीन धार्मिक संप्रदायों सहित उत्तरी अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया, नेपाल, भूटान में बसी आबादी को भी स्थान दिया गया है।
लोबसंग सांग्ये ने वर्ष 2011 में लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली से चुनकर पूर्व प्रधानमंत्री प्रो. सामदोंग रिंपोछे की जगह ली थी। उस दौरान दलाईलामा ने राजनीति से संन्यास की घोषणा की थी।
तिब्बती जनता का शुक्रिया : सांग्ये
दूसरी बार निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री चुने जाने पर डॉ. लोबसंग सांग्ये ने तिब्बती समुदाय का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि वे तिब्बती वोटरों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद करते हैं।
जानिए, कौन हैं डॉ. लोबसंग सांग्ये?
डॉ. लोबसंग सांग्ये का जन्म 1968 में दार्जिलिंग (भारत) में हुआ। वर्तमान में वे मैकलोडगंज में रह रहे हैं। सांग्ये ने दार्जिलिंग के तिब्बती रिफ्यूजी हाई स्कूल में पढ़ाई शुरू की थी। एलएलबी और बीए ऑनर्स दिल्ली विश्वविद्यालय से की। 2004 में हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम और लॉ में डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त की।
सांग्ये हार्वर्ड लॉ स्कूल से लॉ की डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त करने वाले पहले तिब्बती हैं। सांग्ये 1992 में तिब्बत यूथ कांग्रेस के सबसे युवा कार्यकारी सदस्य चुने गए। युवा नेता के तौर पर सांग्ये ने चीन और तिब्बत के विद्वानों के एक साथ पांच सम्मेलन करवाए थे।
वर्ष 2003 में चीन के कई विद्वानों से दलाई लामा की अमेरिका में मुलाकात कराने में अहम भूमिका सांग्ये ने निभाई। सांग्ये तिब्बत की आजादी के समर्थन में दुनिया भर में उग्र प्रदर्शन करने वाले तिब्बती यूथ कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता रह चुके हैं। चीन तिब्बती यूथ कांग्रेस संगठन को आतंकी संगठन करार दे चुका है।