आईएएस को शिक्षा निदेशक तैनात करने का मामला फंसा
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आईएएस अफसर को उच्च शिक्षा निदेशक बनाने का मामला फंस गया है। कार्मिक महकमे ने शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर सवाल खड़े करते हुए फाइल शिक्षा मंत्री को भेज दी है। कार्मिक महकमे का कहना है कि निदेशक बनाने के लिए तय किए गए आरएंडपी नियमों में आईएएस की नियुक्त का प्रावधान नहीं है। ऐसे में निदेशक का चयन करने के लिए अन्य पात्र अफसरों पर विचार करना चाहिए।
अमर उजाला ने 21 मार्च के अंक में शीर्षक ‘आईएएस को उच्च शिक्षा निदेशक बनाने की तैयारी’ से खबर प्रकाशित कर शिक्षा विभाग की मुहिम को उजागर किया था। वर्तमान नियमों के तहत संयुक्त निदेशक के पद पर दो साल सेवाएं देने वाले अधिकारी को निदेशक लगाया जा सकता है। अगर कोई संयुक्त निदेशक के पद पर न रहा हो तो कम से कम सात साल तक कॉलेज प्रिंसिपल के पद पर रहने वाला निदेशक पद के लिए पात्र होगा।
इसके अलावा अगर कोई अधिकारी संयुक्त निदेशक के पद पर कुछ दिन ही रहा हो और कॉलेज प्रिंसिपल सात साल से ज्यादा रहा तो दोनों की वरिष्ठता सात साल से अधिक होनी चाहिए। कॉलेज प्रिंसिपलों का तर्क है कि सरकार को पूरी जानकारी नहीं दी गई है। विभाग में कई ऐसे प्रिंसिपल हैं जो सात साल से अधिक समय से प्रिंसिपल के पद पर तैनात हैं। ऐसे में आईएएस के बजाये विभागीय अधिकारियों को निदेशक बनाया जाना चाहिए।
यह है मामला
उच्च शिक्षा निदेशक अमरदेव की ओर से बीते दिनों सरकार को पत्र भेज कर बताया गया था कि वर्तमान में विभाग में एक भी अधिकारी ऐसा नहीं है जो निदेशक पद के लिए तय मानकों की शर्तें पूरी करता हो। ऐसे में नियमों में बदलाव कर भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए।
उच्च शिक्षा निदेशक ने निदेशक पद के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव करने का सरकार को पत्र लिखा था। बदलाव के लिए निदेशक ने तर्क दिया कि निदेशक पद के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम साल 1973 के हैं। इन नियमों में बीते कई सालों से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
ऐसे में भविष्य में निदेशक चुनने के लिए मुश्किल न हो, इसके लिए नियमों में बदलाव करना जरूरी है। निदेशक के इस पत्र के आधार पर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने आईएएस को निदेशक बनाने का प्रस्ताव तैयार कर कार्मिक महकमे को भेजा।