फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   lilium and tulip flower farming CSIR palampur research with hydroponics technique

बिना मिट्टी ट्यूलिप फूल की हर महीने, लिलियम की साल में छह बार ले सकेंगे फसल

Mon, 01 Mar 2021 12:16 PM IST
अरविन्द ठाकुर विनोद राणा, अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा)
विनोद राणा, अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 01 Mar 2021 12:16 PM IST
विज्ञापन
lilium and tulip flower farming CSIR palampur research with hydroponics technique
सीएसआईआर पालमपुर ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से तैयार किए ट्यूलिप के फूल। - फोटो : अमर उजाला

देश भर में अब फूलों की कमी नहीं होगी। ट्यूलिप फूल की हर महीने जबकि लिलियम की साल में छह बार फसल ली जा सकेगी। सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) संस्थान पालमपुर ने शोध के बाद हाइड्रोपोनिक्स तकनीक विकसित की है। इससे बिना मिट्टी साल में कई बार फूल तैयार किए जा सकेंगे। 

विज्ञापन


अभी तक लिलियम की फसल तैयार होने में चार से पांच और ट्यूलिप फूल की फसल के लिए तीन से चार माह का समय लगता था। सीएसआईआर की हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से खासकर गर्मियों में फूलों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। देश में बढ़ती आबादी और कम हो रही जमीन के लिए यह तकनीक काफी कारागार साबित होगी। इसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक तैयार करने के लिए सीएसआईआर में करीब दो साल से शोध चल रहा था। 
विज्ञापन


अभी नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों से फूलों के बल्ब मंगवाए जाते थे, लेकिन अब फूलों की कमी को देश में पूरा किया जा सकेगा। संस्थान इस तकनीक का प्रशिक्षण फूल उत्पादकों को देगा। इससे आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत किसानों की आर्थिकी भी सुदृढ़ होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

lilium and tulip flower farming CSIR palampur research with hydroponics technique

यह है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पोषक तत्व और पानी का मिश्रण तैयार किया जाता है। इसमें माइक्रो और मेक्रो पदार्थ (फर्टिलाइजर) डाले जाते हैं। फूल या पौधे तैयार करने के लिए ग्रोथ बॉक्स तैयार किया जाता है। इसमें हल्के छेद किए जाते हैं। ग्रोथ बॉक्स में रखे फूलों के बल्बों के इस मिश्रण का पानी दिया जाता है। ग्रोथ बॉक्स में किसी मिट्टी का कोई मिश्रण नहीं होता है। इस विधि से ही फूल और अन्य छोटे पौधे तैयार होते हैं।

संस्थान ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक तैयार की है। इससे फूलों की खेती को काफी बढ़ावा मिलेगा। यह देश में पहली बार होगा। फूलों के अलावा किचन गार्डन से अन्य पौधे भी तैयार किए जा सकते हैं। किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे उनकी आर्थिकी मजबूत होगी। - डॉ. संजय कुमार, सीएसआईआर के निदेशक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed