Shimla News: अवैध निर्माण पर बिजली पानी काटा तो संचालक ने बंद कर दी पार्किंग
नगर निगम आयुक्त कोर्ट से बीते शनिवार बिना अनुमति दुकानें खोलने और मोबाइल टावर लगाने पर इस पार्किंग का बिजली और पानी काटने के आदेश जारी हुए थे।
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शिमला के कोर एरिया की सबसे बड़ी लिफ्ट पार्किंग पर संचालक ने ताला जड़ दिया है। नगर निगम आयुक्त कोर्ट से बीते शनिवार बिना अनुमति दुकानें खोलने और मोबाइल टावर लगाने पर इस पार्किंग का बिजली और पानी काटने के आदेश जारी हुए थे। पार्किंग के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए गए। इसके तुरंत बाद संचालक ने चेन लगाकर पार्किंग को बंद कर दिया। उधर राजधानी में बर्फबारी देखने के लिए शुक्रवार सुबह 9:00 बजे से शहर में सैलानियों की आवाजाही शुरू हो गई लेकिन पार्किंग में इनकी गाड़ियों को एंट्री नहीं मिली। साथ लगती मेट्रोपोल और पर्यटन विभाग की पार्किंग भी सुबह ही फुल हो गई। इसके बाद दिन भर सैलानी सर्कुलर रोड पर पार्किंग के लिए भटकते रहे। इसके बाद पुलिस को एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।
सैलानियों को छोटा शिमला, ओल्ड बस स्टैंड की रेलवे और टुटीकंडी पार्किंग में गाड़ियां पार्क करने के लिए भेजा गया। कई सैलानियों ने सर्कुलर रोड के किनारे ही गाड़ियां खड़ी कर दीं। कई पार्किंग के लिए भटकते रहे। देर शाम तक संचालक ने पार्किंग बंद रखी। नगर निगम को दोपहर बाद जाकर पार्किंग बंद होने की सूचना मिली। आयुक्त ने कर्मचारियों से इस मामले की रिपोर्ट ली। निगम प्रशासन का कहना है कि संचालक की ऐसी ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी। बिना अनुमति टावर लगाने और दुकानें खोलने पर आयुक्त कोर्ट से बिजली पानी काटने के आदेश जारी हुए थे। संचालक का दावा है कि निगम प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की है।
56 करोड़ से बनी है 653 गाड़ियों की यह पार्किंग
शहर के सर्कुलर रोड पर पीपीपी मोड पर बनी 653 गाड़ियों की यह पार्किंग 56 करोड़ रुपये से तैयार की गई है। साल 2016 में पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। इस पार्किंग के तीन भाग हैं। इसमें गाड़ियों के लिए पार्किंग, व्यावसायिक क्षेत्र और वैल्यू एडिड सर्विस शामिल है।
कुछ गलत नहीं किया : सूद
पार्किंग संचालक गौरव सूद ने दावा किया कि साल 2016 और 2019 में नगर निगम ने ही इस पार्किंग की कंपलीशन को मंजूरी दी थी। यदि निर्माण गलत था तो निगम ने उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की? नगर निगम ने किसी राजनीतिक दबाव में यह कार्रवाई की है। चार जनवरी को हमें नोटिस दिया गया और तीन दिन बाद ही सात जनवरी को बिजली-पानी काटने के आदेश दे दिए। वीरवार शाम बिजली पानी कट गया। बिजली न होने से पर्ची काटने वाली मशीनें नहीं चल सकती। बिना पानी के शौचालय बंद हैं। बिना सुविधाओं के पार्किंग नहीं चला सकते, इसलिए इसे बंद कर दिया।