छात्रवृत्ति घोटाला करने वाले कई निजी संस्थानों पर नेताओं का हाथ
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शिक्षा विभाग में सामने आए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के तार राजनीतिक दलों के नेताओं से भी जुड़ रहे हैं। घोटाला करने वाले कई निजी शिक्षण संस्थानों पर नेताओं के हाथ होने की बात भी विभागीय जांच में सामने आई है।
हालांकि, विभागीय अधिकारी इस बाबत कुछ भी कहने से गुरेज कर रहे हैं, लेकिन इतना तय हो गया है कि सीबीआई का शिकंजा कसने पर कई सफेदपोश बेनकाब होंगे।
शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धनराशि हड़पने वाले कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने पूर्व में छात्रवृत्ति न मिलने को लेकर उजागर हुई शिकायतों को नेताओं की मदद से बंद तक करवा दिया।
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिक्षा विभाग के अफसरों को फोन कर शिकायतों को मामूली बताते हुए रफा-दफा करवा दिया। शिकायत करने वालों को आवाज उठाते ही छात्रवृत्ति की अदायगी भी करवा दी।
साल 2013-14 से लेकर 2016-17 तक बड़े ही चरणबद्ध तरीके से इस खेल को अंजाम दिया गया। अब उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीआई जांच शुरू होते ही सरकारी धनराशि का दुरुपयोग करने वाले निजी शिक्षण संस्थान और उनका साथ देने वाले नेता बेनकाब होंगे।
तबादले रुकवाने को निदेशालय तक पहुंचे
उच्च शिक्षा निदेशालय की छात्रवृत्ति शाखा में नियुक्त एक अफसर का तबादला रुकवाने के लिए कई निजी शिक्षण संस्थानों ने सरकार पर भारी दबाव तक बनाया है।
कुछ संस्थानों के प्रबंधक तो निदेशालय तक भी तबादले रुकवाने की सिफारिशें लेकर पहुंचे हैं। कुछ नेताओं ने भी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को छात्रवृत्ति शाखा का स्टाफ न बदलने के फोन किए हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक छात्रवृत्ति घोटाला की विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को नहीं सौंपी गई है। सीएम ऑफिस में रिपोर्ट आने के बाद इसे कार्मिक मंत्रालय भेजा जाएगा। कार्मिक मंत्रालय जांच के लिए मामला सीबीआई को सौंपेंगे।