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लॉ विवि घंडल खुला, कक्षाओं में नहीं लौटे आंदोलनरत छात्र

Thu, 26 Sep 2019 06:18 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 26 Sep 2019 06:18 PM IST
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law university ghandal shimla opened student did not join classes
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घंडल - फोटो : सोशल मीडिया

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घंडल आठ दिन बाद गुरुवार को खुल गई। मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलनरत छात्रों ने गुरुवार को भी प्रदर्शन जारी रखा और कक्षाओं का बहिष्कार किया। चांसलर के आदेशों पर 18 से 25 सितंबर तक विवि को बंद करने के जारी नोटिस के बाद विवि में कक्षाएं बंद पड़ी थीं। गुरुवार को समय सीमा समाप्त होने के बाद विश्वविद्यालय खुला जरूर लेकिन छात्र कक्षाओं में नहीं आए। आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राएं धरने पर ही डटे रहे।

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छात्र-छात्राओं के आंदोलन को लीड कर रहे कुछ छात्रों ने गुरुवार को राजधानी में पत्रकारवार्ता कर कहा कि विवि में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। छात्रों ने कहा कि वह ढाई लाख तक की फीस अदा करने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। 4 सालों से उन्हें पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा। इसके अलावा उपयुक्त छात्रावास सुविधा भी नहीं मिल रही, छात्रावासों की हालत खस्ता हो चुकी है, खाने की गुणवत्ता सही नहीं है। 
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छात्र-छात्राओं ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक विवि प्रशासन उनकी तमाम मांगों को लिखित में नहीं मानता। विवि के कुलपति पहले ही लिखित में कुछ भी दे पाने में अपनी असमर्थता जता चुकी है। इससे छात्रों और प्रशासन के बीच गतिरोध जारी है, जिसके चलते कक्षाएं नहीं लग पा रहीं। छात्र एसके  चौधरी, उज्जवल रॉव, शिवा नमन, अंगत सहारन, और पारखी जैने ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई के हो रहे नुकसान को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन और प्रदेश सरकार उनकी मांगों को पूरा करें।
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विवि की लाइब्रेरी में बैठने की पर्याप्त सुविधा नहीं 
पत्रकारों से बातचीत में लॉ विवि के छात्रों ने कहा कि विवि में पुस्तकालय तक की सुविधा सही नहीं है, यहां सिर्फ 40 छात्र ही बैठ सकते हैं। दो हाल बनाए हैं लेकिन लाइब्रेरी नहीं बनाई है, गर्ल्स हास्टल की टाइमिंग तक अलग-अलग रखी है। पहाड़ी पर बने इस विवि में खेलकूद के लिए कोई सुविधा नहीं है। छात्रों को अपनी बात रखने के लिए कोई मंच नहीं न ही कोई कार्यकारिणी गठित की गई है।

वेबसाइट पर भी इसका कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है। संस्थान में मूट कोर्ट, सेमीनार वर्कशाप, लेक्चर गेस्ट फैकल्टी की सुविधा नहीं मिल रही। कहा कि ऐसे में कैसे प्रोफेशनल तैयार होंगे। यूनिवर्सिटी को बने हुए चार साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक यहां एंबुलेंस और मेडिकल की कोई सुविधा नहीं है।


क्लर्क के पास ही दवाओं का स्टॉक रहता है। छात्रावासों में शिक्षकों को ही वार्डन बनाया है जो चाह कर भी छात्रों की समस्याओं का हल नहीं कर पाते। परिवहन सुविधा भी नाम मात्र दी जा रही है। सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ तक नहीं मिल रहा। छात्रों ने सरकार से इन सभी समस्याओं का समाधान करने का आग्रह किया है।

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