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Shimla News: भट्ठाकुफर फल मंडी में पहाड़ी से भूस्खलन
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सेब कारोबारी दूसरी जगह किए शिफ्ट
भूस्खलन के वक्त मंडी में चल रही थी खरीद फरोख्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की भट्ठाकुफर फल मंडी में मंगलवार सुबह पहाड़ी से भूस्खलन के साथ मलबा ऑक्शन यार्ड में गिर गया। अचानक मलबा गिरता देख यहां अफरा-तफरी मची रही। इसके बाद यहां कारोबार कर रहे आढ़तियों को शिफ्ट किया गया।
लोगों के अनुसार सुबह करीब 8:30 बजे पहाड़ी से हल्के पत्थर गिरना शुरू हुए। इस दौरान मंडी में सेब कारोबार चल रहा था। मलबा गिरने की आवाज आते ही सभी आढ़ती बाहर की ओर भागे। पत्थर गिरने से ऑक्शन यार्ड की जालियां टूट गईं। हालांकि इस दौरान किसी भी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। इसके बाद पांच आढ़ती निचली तरफ बने ऑक्शन यार्ड में शिफ्ट किए गए। आधे आढ़तियों ने पुरानी जगह पर ही कारोबार किया। आढ़तियों का कहना है कि अभी शिमला के ऊपरी इलाकों से सेब की पूरी फसल आना बाकी है, वही मंडी में पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। यदि आने वाले समय में यही हाल रहा तो इस वाली मंडी में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। कोटखाई से सेब लेकर पहुंचे बागवान मेहर चंद ने बताया कि मंडी से कुछ आढ़ती पराला और परमाणु मंडी में शिफ्ट होना शुरू हो गए हैं। अगले तीन से चार सालों में यहां पर 5 से 6 आढ़ती ही दिखाई देंगे।
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भूस्खलन के वक्त मंडी में चल रही थी खरीद फरोख्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की भट्ठाकुफर फल मंडी में मंगलवार सुबह पहाड़ी से भूस्खलन के साथ मलबा ऑक्शन यार्ड में गिर गया। अचानक मलबा गिरता देख यहां अफरा-तफरी मची रही। इसके बाद यहां कारोबार कर रहे आढ़तियों को शिफ्ट किया गया।
लोगों के अनुसार सुबह करीब 8:30 बजे पहाड़ी से हल्के पत्थर गिरना शुरू हुए। इस दौरान मंडी में सेब कारोबार चल रहा था। मलबा गिरने की आवाज आते ही सभी आढ़ती बाहर की ओर भागे। पत्थर गिरने से ऑक्शन यार्ड की जालियां टूट गईं। हालांकि इस दौरान किसी भी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। इसके बाद पांच आढ़ती निचली तरफ बने ऑक्शन यार्ड में शिफ्ट किए गए। आधे आढ़तियों ने पुरानी जगह पर ही कारोबार किया। आढ़तियों का कहना है कि अभी शिमला के ऊपरी इलाकों से सेब की पूरी फसल आना बाकी है, वही मंडी में पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। यदि आने वाले समय में यही हाल रहा तो इस वाली मंडी में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। कोटखाई से सेब लेकर पहुंचे बागवान मेहर चंद ने बताया कि मंडी से कुछ आढ़ती पराला और परमाणु मंडी में शिफ्ट होना शुरू हो गए हैं। अगले तीन से चार सालों में यहां पर 5 से 6 आढ़ती ही दिखाई देंगे।
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