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प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों शुरू होगा लक्ष्य कार्यक्रम

Sun, 07 Oct 2018 10:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 07 Oct 2018 10:50 AM IST
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lakshya Program will start in All medical colleges and district hospitals in the himachal

राष्ट्रीय प्रसूति कक्ष गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम लक्ष्य को राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्रथम रेफरल इकाइयों में प्रभावी ढंग से लागू करेगी। शुरू में यह कार्यक्रम राज्य की 19 स्वास्थ्य इकाइयों में शुरू किया जा रहा है।

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प्रधान सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने शनिवार को शिमला में लक्ष्य पर एनएचएम की ओर से आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह जानकारी दी।
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प्रधान सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि इस पहल के लिए भारत सरकार हिमाचल प्रदेश को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। लक्ष्य कार्यक्रम प्रसूति और प्रसूति के तुरंत बाद देखभाल में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक पहल है, जो मातृ एवं शिशु के बहुमूल्य जीवन को बचाने के एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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लक्ष्य कार्यक्रम माता और बच्चे के स्वास्थ्य को निर्धारित करेगा। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों को रूटीन ड्यूटी से हटकर सोचना होगा और कार्य करना होगा। तभी हम लक्ष्यों को हासिल कर सकेंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की कार्यक्रम प्रबंध टीम के सदस्य डॉ. आशुतोष सारवा ने लक्ष्य पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम आरंभ होने के बाद देश में मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।

हिमाचल में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कम

lakshya Program will start in All medical colleges and district hospitals in the himachal

 उन्होंने कहा कि लक्ष्य के कार्यान्वयन के लिए अस्पतालों में ढांचागत बदलाव किए जा रहे हैं। इस अवसर पर मिशन निदेशक एनएचएम मनमोहन शर्मा ने प्रदेश में लक्ष्य को लागू करने की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जो स्वास्थ्य संस्थान निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में सक्षम रहेंगे, उनके स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।कार्यक्रम के दौरान राज्य की एक पहल सुरक्षा पर भी रिपोर्ट जारी की गई।

इस पहल के तहत दूरदराज के इलाकों में घर पर प्रसव होने की स्थिति में मीसोप्रोस्टोल की गोली खिलाई जाती है। यह पहल राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई है। इससे माता मृत्यु दर में कमी आई है।

रिपोर्ट में राज्य की मातृ मृत्यु दर 77 पाई गई है, जो राष्ट्रीय दर 137 से काफी कम है। इस अवसर पर प्रधान सचिव ने बच्चों में निमोनिया की रोकथाम के लिए तकनीकी दिशा निर्देश पुस्तिका और मातृ मृत्यु दर का विमोचन भी किया।

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