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हिमाचल में ढह गया आईएएस का पिरामिड
प्रेम प्रताप सिंह /अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 14 Dec 2014 11:28 AM IST
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हिमाचल प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अफसरों का पिरामिड पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। प्रधानसचिव से लेकर सचिव और विशेष सचिव के आधे से अधिक पद खाली पड़े हुए है।
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तस्वीर यह है कि राज्य को ढूंढे भी सचिव नहीं मिल पा रहे हैं। आने वाले पांच साल के भीतर सूबे में न केवल सचिव बल्कि प्रधानसचिवों की कमी से जूझना पड़ सकता है। किसी भी सरकार के लिए राज्य सचिवालय की प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन करना बेहद मुश्किल होगा।
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राज्य कार्मिक विभाग के आंकड़े के अनुसार प्रदेश में 147 आईएएस अफसरों का काडर स्वीकृत है। इनमें से सीधे भर्ती वाले 103 आईएएस है, जबकि 44 अफसर प्रमोशन के माध्यम से आईएएस बनते है। इनमें से अभी आईएएस के 42 पद खाली पड़े हुए है।
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राज्य में आईएएस के 105 पद ही भर पाए है। फील्ड स्तर पर तो आईएएस अधिकारियों की तैनाती में कोई खास परेशानी नहीं आ रही है, लेकिन सचिवालय प्रशासन को चलाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है।
एक-एक करके सीनियर आईएएस अधिकारी डेपुटेशन पर दिल्ली रवाना होते जा रहे हैं। इससे सचिवालय की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। एक-एक अफसरों से पांच से छह महकमों के भार थमाए गए है।
एक तो ऐसे प्रधान सचिव है, जिन्हें 10 से अधिक विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रधान सचिव कार्मिक एसकेबीएस नेगी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश निश्चित तौर पर आईएएस की भारी कमी से जूझ रहा है।
सन 1990 से लेकर 2000 के बीच प्रदेश को काफी कम आईएएस अधिकारी मिले, जिसके कारण सचिव स्तर पर अब अफसरों की कमी नजर आ रही है।
हिमाचल प्रदेश काडर के 25 अफसर डेपुटेशन पर गए हुए है। केंद्र के मानक के अनुसार फिलहाल प्रदेश के अधिकतम 32 अधिकारी तक डेपुटेशन पर जा सकते है। ऐसे में अगर सात और अधिकार चले गए तो राज्य सचिवालय की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी।
हालांकि डेपुटेशन पर जाने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी, उपमा चौधरी, प्रधान सचिव तरुण श्रीधर की ओर से पहले ही आवेदन किया जा चुका है।