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Shimla News: नए 4 श्रम कानूनों के विरोध में सड़कों पर उतरे मजदूर संगठन
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पंचायत भवन से उपायुक्त कार्यालय तक निकाली विरोध रैली, केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
नए कानून वापस लेने का किया आग्रह, उग्र संघर्ष की धमकी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्र सरकार अधिसूचित चार लेबर कोड के खिलाफ राजधानी शिमला में मजदूर संगठनों ने बुधवार को रैली निकाली और प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सीटू, हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ, छात्र संगठन एसएफआई, जनवादी महिला समिति, एआईएलयू, और पेंशनर एसोसिएशन के सदस्य शामिल हुए।
पंचायत भवन से शुरू हुई विरोध रैली में शामिल मजदूरों और अन्य वामपंथी विचारधारा से संबद्ध संगठनों के कार्यकर्ताओं ने लेबर कोड और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तथा उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ब्लॉक स्तर पर भी इस तरह के प्रदर्शन किए गए। संगठनों ने 4 लेबर कोड (श्रम कानून) वापस लेने, मजदूरों का मासिक न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, आउटसोर्स, ठेका, कैजुअल, सेवा मित्र, मल्टी टास्क मजदूरों की भर्ती बंद कर इसकी जगह नियमित भर्ती करने की मांगों को उठाया। किसान सभा नेता डॉ. ओंकार शाद, सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कोषाध्यक्ष जगत राम, पेंशनर एसोसिएशन नेता जगमोहन ठाकुर, महेश वर्मा, कुंदन शर्मा, हेमराज चौधरी, किसान नेता सत्यवान पुंडीर विभिन्न संघों के नेताओं ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के 12 घंटे डयूटी और महिलाओं की रात्रि शिफ्ट डयूटी के आदेश वापस लें। किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने, किसानों की बेदखली बंद करने, भूमिहीनों और गरीब किसानों को 5 बीघा भूमि देने, फोरलेन तथा एनएच प्रभावितों को चार गुना मुआवजा देने, दूध का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांगें उठाईं।
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मनरेगा में 200 दिन कार्य और दिहाड़ी 500 रुपये करने, अनुसूचित जाति जनजाति और महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों पर रोक लगाने का आग्रह किया। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि राजधानी सहित पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शन में जयशिव ठाकुर, सीटू महासचिव अमित कुमार, कोषाध्यक्ष बालक राम, सचिव विवेक कश्यप, एचपीएमआरए नेता हुक्म शर्मा, सेठ चंद शर्मा, चमन ठाकुर, एसएफआई नेता अनिल ठाकुर, सन्नी सिकटा, जनवादी महिला समिति नेता हिमी देवी, रमा रावत, डीवाईएफआई नेता एडवोकेट सुरजीत कुमार शामिल हुए। इनके अलावा एडवोकेट टेक चंद, रंजीव कुठियाला, राम प्रकाश, प्रताप चौहान, कपिल नेगी, वीरेंद्र लाल, नोख राम, दलीप सिंह, पंकज शर्मा, ओमप्रकाश, हेमराज, विनीत, निशा, उमा, अमित भाटिया, पाला राम, शिवराम, दलविंद्र, अशोक, रजनी, दर्शन लाल, राकेश सलमान ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
श्रम कानूनों के दायरे से बाहर होंगे 74 फीसदी मजदूर
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेेंद्र मेहरा ने चारों लेबर कोड को मजदूर विरोधी और अमीरों को लाभ पहुंचाने वाले करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे 70 फीसदी उद्योग और 74 फीसदी औद्योगिक मजदूर श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इससे ईपीएफ, ईएसआई, बोनस कानूनों पर जबरदस्त हमला होगा। ठेका मजदूरों और आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा कमजोर होगी। फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, हायर एंड फायर नीति को बढ़ावा मिलेगा।
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नए कानून वापस लेने का किया आग्रह, उग्र संघर्ष की धमकी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्र सरकार अधिसूचित चार लेबर कोड के खिलाफ राजधानी शिमला में मजदूर संगठनों ने बुधवार को रैली निकाली और प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सीटू, हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ, छात्र संगठन एसएफआई, जनवादी महिला समिति, एआईएलयू, और पेंशनर एसोसिएशन के सदस्य शामिल हुए।
पंचायत भवन से शुरू हुई विरोध रैली में शामिल मजदूरों और अन्य वामपंथी विचारधारा से संबद्ध संगठनों के कार्यकर्ताओं ने लेबर कोड और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तथा उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ब्लॉक स्तर पर भी इस तरह के प्रदर्शन किए गए। संगठनों ने 4 लेबर कोड (श्रम कानून) वापस लेने, मजदूरों का मासिक न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, आउटसोर्स, ठेका, कैजुअल, सेवा मित्र, मल्टी टास्क मजदूरों की भर्ती बंद कर इसकी जगह नियमित भर्ती करने की मांगों को उठाया। किसान सभा नेता डॉ. ओंकार शाद, सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कोषाध्यक्ष जगत राम, पेंशनर एसोसिएशन नेता जगमोहन ठाकुर, महेश वर्मा, कुंदन शर्मा, हेमराज चौधरी, किसान नेता सत्यवान पुंडीर विभिन्न संघों के नेताओं ने संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि मजदूरों के 12 घंटे डयूटी और महिलाओं की रात्रि शिफ्ट डयूटी के आदेश वापस लें। किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने, किसानों की बेदखली बंद करने, भूमिहीनों और गरीब किसानों को 5 बीघा भूमि देने, फोरलेन तथा एनएच प्रभावितों को चार गुना मुआवजा देने, दूध का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांगें उठाईं।
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मनरेगा में 200 दिन कार्य और दिहाड़ी 500 रुपये करने, अनुसूचित जाति जनजाति और महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों पर रोक लगाने का आग्रह किया। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि राजधानी सहित पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शन में जयशिव ठाकुर, सीटू महासचिव अमित कुमार, कोषाध्यक्ष बालक राम, सचिव विवेक कश्यप, एचपीएमआरए नेता हुक्म शर्मा, सेठ चंद शर्मा, चमन ठाकुर, एसएफआई नेता अनिल ठाकुर, सन्नी सिकटा, जनवादी महिला समिति नेता हिमी देवी, रमा रावत, डीवाईएफआई नेता एडवोकेट सुरजीत कुमार शामिल हुए। इनके अलावा एडवोकेट टेक चंद, रंजीव कुठियाला, राम प्रकाश, प्रताप चौहान, कपिल नेगी, वीरेंद्र लाल, नोख राम, दलीप सिंह, पंकज शर्मा, ओमप्रकाश, हेमराज, विनीत, निशा, उमा, अमित भाटिया, पाला राम, शिवराम, दलविंद्र, अशोक, रजनी, दर्शन लाल, राकेश सलमान ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
श्रम कानूनों के दायरे से बाहर होंगे 74 फीसदी मजदूर
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेेंद्र मेहरा ने चारों लेबर कोड को मजदूर विरोधी और अमीरों को लाभ पहुंचाने वाले करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे 70 फीसदी उद्योग और 74 फीसदी औद्योगिक मजदूर श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इससे ईपीएफ, ईएसआई, बोनस कानूनों पर जबरदस्त हमला होगा। ठेका मजदूरों और आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा कमजोर होगी। फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, हायर एंड फायर नीति को बढ़ावा मिलेगा।