कुमारहट्टी हादसा: निर्माण के लिए मापदंड न होने से जांच पर सवाल, ऐसे खड़ा कर दिया बहुमंजिला भवन
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कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर सहज तंदूरी ढाबा हादसे की भले ही मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई हो। लेकिन ग्रामीण इलाकों में निर्माण संबंधी नियमों के अभाव में जांच का आधार क्या होगा इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल, जिस जगह ढाबे का भवन गिरा है वहां टीसीपी एक्ट लागू नहीं होता है। ऐसे में निर्माण नक्शे के मुताबिक हो ये जरूरी नहीं है। निर्माण कहां और कितनी मंजिल तक हो सकता है इसे लेकर नियम कायदे नहीं हैं।
हादसे के शिकार हुए ढाबे का भवन नाहन मार्ग पर नेशनल हाइवे से महज 500 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। और यह इलाका टीसीपी के दायरे में भी नहीं आता। यहां यह जानना भी दिलचस्प है कि करीब एक साल पूर्व टीसीपी ने शिकायत मिलने पर साफ कह दिया था कि ग्रामीण क्षेत्र उनके अधीन नहीं हैं।
जिन क्षेत्रों में टीसीपी एक्ट लागू है वहां नक्शे बनाने से लेकर बिजली और पानी का कनेक्शन लेने तक टीसीपी की मंजूरी लेनी पड़ती है। ऐसे क्षेत्रों के भवन निर्माण में कोई अड़चन आती है तो उसके लिए सीधे तौर पर टीसीपी को जवाबदेह माना जाता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह नियम लागू नहीं है।
जांच कमेटी में टीसीपी को भी शामिल करेंगे : एसडीएम
हादसे के जांच अधिकारी एसडीएम रोहित राठौर का कहना है कि वे इस मामले में जांच कमेटी का विस्तार करेंगे। टीसीपी, पर्यटन विभाग, बिजली बोर्ड व आईपीएच को जांच के साथ जोड़ा जाएगा।
यह सभी विभाग कहीं न कहीं भवन निर्माण में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सारे तथ्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने कहा कि 15 दिन के बाद यह तय हो जाएगा कि कौन जिम्मेदार है और निर्माण में जांच किस अधिकारी को करनी थी।
बख्शे नहीं जाएंगे दोषी : उपायुक्त
उपायुक्त केसी चमन का कहना है कि बहुमंजिला भवन का निर्माण हुआ था जो धराशायी हो गया है। हादसे की जांच होगी और इसमें जिस भी विभाग या अधिकारी की लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण किन हालात में हुआ, उसे रोका क्यों नहीं गया जैसे सवालों के को लेकर जवाबदेही तय की जाएगी।