शाही अंदाज में निकली जलेब, पालकी में सवार हुए महेश्वर
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अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दूसरे दिन ढोल-नगाड़ों की थाप पर भगवान नर सिंह की जलेब शाही अंदाज में निकाली गई। ढोल, नगाड़े, नरसिगों और करनालों की स्वर लहरियों से ढालपुर मैदान गूंज उठा। रघुनाथ के अस्थायी शिविर से निकली जलेब उत्सव में आए लोगों का आकर्षण का केंद्र रही। जलेब में अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार हुए। महाराजा कोठी के देवताओं ने भी जलेब की शोभा बढ़ाई।
शाही जलेब में सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी सज-धजकर चली। राजा की चानणी से जलेब शुरू हुई और अस्पताल रोड से होती हुई राजा की चानणी के पास ही समाप्त हुई। पीज के देवता जमदग्नि ऋषि, खल्याणी के देवता पंचवीर, जौंगा के देवता हुरंग नारायण, जौंगा के देवता महावीर, कमांद के देवता वीरकैला, लोट के गढ़पति वीरकैला ने शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। सभी देवता राजा की पालकी के साथ चले।
महेश्वर के पालकी में सवार होने पर उठ चुके हैं सवाल
मान्यता है कि भगवान नर सिंह पूरे क्षेत्र की परिक्रमा कर सुरक्षा की कार बांधते हैं। गौर रहे कि दशहरा उत्सव के दूसरे दिन से भगवान रघुनाथ की जलेब निकालने की परंपरा है। राजा को पालकी में बिठाया जाता है। इसमें सैंज, आनी और महाराजा आदि क्षेत्रों के देवता शामिल होते हैं।
दशहरा उत्सव में आए विदेशी मेहमानों ने भी जलेब का आनंद लिया। अधिष्ठाता देव भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि जलेब की पुरातन परंपरा का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया जा रहा है।
दशहरा उत्सव में देवताओं के साथ पालकी में बैठने को लेकर विवाद होने के बाद भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार हुए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कुछ समय पूर्व कहा था कि राजशाही का अंत बहुत पहले हो गया है। कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह ने पलटवार कर कहा था कि वह सिर्फ परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं।