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हिमाचल: रुपिन पास के पास बर्फीले तूफान में फंसे चरवाहों को पुलिस ने बचाया, भेड़-बकरियां भी सुरक्षित निकालीं
Sun, 04 Oct 2026 05:32 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 04 Oct 2026 05:32 PM IST
सार
किन्नौर के रुपिन पास के समीप भारी बर्फबारी और बर्फीले तूफान में फंसे चरवाहों को पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। 29 और 30 सितंबर को चलाए गए रेस्क्यू अभियान में करीब 1600 से 1700 भेड़-बकरियों को भी सुरक्षित बचाया गया। टीम ने बर्फ में दबी दो बकरियों और तीन भेड़ों को भी जीवित बाहर निकाला।
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र्फीले तूफान में फंसे चरवाहों को पुलिस ने बचाया
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में खराब मौसम के बीच रुपिन पास के समीप फंसे चरवाहों के लिए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सफल रेस्क्यू अभियान चलाया। भारी बर्फबारी, ओलावृष्टि और बर्फीले तूफान के बीच दुर्गम इलाके में फंसे सभी चरवाहों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इतना ही नहीं, रेस्क्यू टीम ने करीब 1600 से 1700 भेड़-बकरियों को भी सुरक्षित वापस लाया।
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जानकारी के अनुसार सांगला कांडा से डोडरा क्वार की ओर जा रहे चरवाहे रुपिन पास के समीप अचानक मौसम खराब होने के कारण मुश्किल में फंस गए थे। क्षेत्र में भारी ओलावृष्टि के साथ बर्फीला तूफान शुरू हो गया था। इसके कारण चरवाहों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। 27 सितंबर को पुलिस को चरवाहों के फंसे होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त रेस्क्यू टीम गठित की। टीम ने मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों की चुनौती के बावजूद प्रभावित क्षेत्र की ओर अभियान शुरू किया।
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भारी बर्फबारी के बीच पहुंची रेस्क्यू टीम
29 और 30 सितंबर को पुलिस और राजस्व विभाग की टीम अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में पहुंची। उस समय इलाके में भारी बर्फबारी और बर्फीला तूफान चल रहा था। रास्ते में जमा बर्फ और खराब मौसम ने रेस्क्यू अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद टीम ने अभियान को जारी रखा और एक-एक कर सभी चरवाहों को सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाया। रेस्क्यू के दौरान पशुधन को बचाने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए।
29 और 30 सितंबर को पुलिस और राजस्व विभाग की टीम अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में पहुंची। उस समय इलाके में भारी बर्फबारी और बर्फीला तूफान चल रहा था। रास्ते में जमा बर्फ और खराब मौसम ने रेस्क्यू अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद टीम ने अभियान को जारी रखा और एक-एक कर सभी चरवाहों को सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाया। रेस्क्यू के दौरान पशुधन को बचाने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए।
बर्फ में दबी दो बकरियां और तीन भेड़ें जिंदा निकालीं
अभियान के दौरान रेस्क्यू टीम ने बर्फ में दबी दो बकरियों और तीन भेड़ों को भी जीवित बाहर निकाला। इसके अलावा करीब 1600 से 1700 भेड़-बकरियों को सुरक्षित वापस लाया गया। पशुधन को सुरक्षित निकालना भी अभियान की बड़ी चुनौती थी, क्योंकि भारी बर्फबारी के कारण दुर्गम क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल बनी हुई थी।
अभियान के दौरान रेस्क्यू टीम ने बर्फ में दबी दो बकरियों और तीन भेड़ों को भी जीवित बाहर निकाला। इसके अलावा करीब 1600 से 1700 भेड़-बकरियों को सुरक्षित वापस लाया गया। पशुधन को सुरक्षित निकालना भी अभियान की बड़ी चुनौती थी, क्योंकि भारी बर्फबारी के कारण दुर्गम क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल बनी हुई थी।
पुलिस की तत्परता से टला बड़ा खतरा
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद पुलिस और राजस्व विभाग की टीम लगातार अभियान में जुटी रही। पुलिस कर्मियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना चरवाहों और उनके पशुधन को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई। समय रहते चलाए गए इस रेस्क्यू अभियान से चरवाहों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदलने की स्थिति में यह अभियान पुलिस और प्रशासन की तत्परता का भी उदाहरण है।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद पुलिस और राजस्व विभाग की टीम लगातार अभियान में जुटी रही। पुलिस कर्मियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना चरवाहों और उनके पशुधन को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई। समय रहते चलाए गए इस रेस्क्यू अभियान से चरवाहों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदलने की स्थिति में यह अभियान पुलिस और प्रशासन की तत्परता का भी उदाहरण है।