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एसपी शिमला की बढ़ी मुश्किलें, डीएसपी ने की घंटों पूछताछ
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 19 Jul 2017 02:02 PM IST
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आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में फंसे एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं। बीते सोमवार शाम किन्नौर पुलिस के एक डीएसपी स्तर के अधिकारी ने नेगी से घंटों पूछताछ की।
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जांच अधिकारी ने न सिर्फ नेगी से उनका बयान दर्ज किया बल्कि उनसे आत्महत्या करने वाले खयाडुप ज्ञाछो द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट में दर्ज जानकारी पर सवाल भी किए। सूत्रों का कहना है कि भारी राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के बीच किन्नौर पुलिस मामले में हर कदम एहतियात के साथ उठा रही है।
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यह पूछताछ ऐसे समय में हुई है, जब कोटखाई प्रकरण में स्थानीय पुलिस की जांच सवालों के घेरे में है। यही नहीं, मुख्यमंत्री तक इस जांच और जिले के डीसी व एसपी के रवैये को लेकर खासे नाराज हैं। सूत्रों का कहना है कि किन्नौर पुलिस कथित दबाव के चलते अब तक मामले में गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।
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शिमला पुलिस ने करीब दो साल पहले आईटीबीपी के एक जवान की आत्महत्या के ऐसे ही एक मामले में असिस्टेंट कमांडेंट और मंडी पुलिस ने हाल ही में फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत के मामले में एक बीओ समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की थी। लेकिन किन्नौर में 13 जून को हुई आत्महत्या के मामले में अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
क्या था मामला
किन्नौर के रारंग गांव निवासी खयाडुप ज्ञाछो (45) का शव 13 जून को रिकांगपिओ टैक्सी स्टैंड के पास मिला था। ज्ञाछो की पत्नी भजन देवी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके पति ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दी है।
भजन देवी के अनुसार सुसाइड नोट में मृतक ज्ञाछो ने तीन पुलिस वालों के नाम और रैंक लिखकर बताया कि वे इनकी प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर रहे हैं। सुसाइड नोट में एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी, पूह थाने के एएसआई रमेश और हेड कांस्टेबल हुकुम का नाम था।
दबाव के बीच स्थानीय अफसरों ने खुद के फंसने के डर से एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन सुसाइड नोट और उसमें दर्ज आरोपियों के नामों को नजरअंदाज कर अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मामला दर्ज कर लिया। एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद पुलिस अब तक मामले में सिर्फ पूछताछ ही कर सकी है।