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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Khushwant Singh litfest 2023: Congress Leader and Actor Raj Babbar Comment on Abhishek Bachchan and Amitabh

Khushwant Singh litfest: राज बब्बर बोले- लोग अमिताभ के नाम से जानते हैं अभिषेक को

Mon, 16 Oct 2023 11:31 AM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 16 Oct 2023 11:31 AM IST
सार

राज बब्बर ने बताया कि उन्होंने 6000 रुपये में स्कूटर बेचा और 100 रुपये लेकर मुंबई में किस्मत आजमाने आए।

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Khushwant Singh litfest 2023: Congress Leader and Actor Raj Babbar Comment on Abhishek Bachchan and Amitabh
खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में संवाद करते कांग्रेस नेता और अभिनेता राज बब्बर, बेटी जूही बब्बर। - फोटो : संवाद

विस्तार

कसौली में चल रहे खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन कांग्रेस नेता और अभिनेता राज बब्बर ने मायानगरी मुंबई में युवा चेहरों की जल्दबाजी पर खुलकर चर्चा की। उनकी बेटी जूही बब्बर उनके साथ रहीं और दामाद अनूप सोनी ने उनके साथ संवाद किया। राज बब्बर ने कहा कि जो बाल कलाकार समय से पहले फिल्मों में आ जाते हैं, उन्हें बाद में रिजेक्ट कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यही हाल अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन और मेरे बेटे आर्य का हुआ।

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अगर अमिताभ का बेटा पूरी तरह से सीख कर आता तो आज उसे अमिताभ का बेटा नहीं कहते। उन्होंने कहा कि चाइल्ड आर्टिस्ट के फेल होने का बड़ा कारण जल्द फिल्मों में आना है। उनके और अमिताभ को बेटे को पहली फिल्म में काम देने वाले प्रोड्यूसर और डायरेक्टर एक ही थे। अकसर जिन्हें बचपन में फिल्मों में रोल मिलता है, बड़े होने पर वे मायानगरी में फेल हो जाते हैं।
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स्कूटर बेचकर आए फिल्मों में
राज बब्बर ने बताया कि उन्होंने 6000 रुपये में स्कूटर बेचा और 100 रुपये लेकर मुंबई में किस्मत आजमाने आए। वे 6000 रुपये उन्होंने अपनी पत्नी को दे दिए और कहा कि हर महीने इससे 500 रुपये निकाल लेना और घर का खर्चा निकाल लेना। घर खर्च फिर भी 650 से 700 रुपये था। उसके बाद उन्होंने उनकी किस्मत ने उन्हें एक स्टार बना दिया।
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दोस्त लाया था राजनीति में
राज बब्बर ने कहा कि उन्होंने अपने एक दोस्त की मदद यूपी चुनाव के दौरान की थी। उन्हें उसके बाद राज्यसभा सांसद बनने का ऑफर उसी दोस्त ने दिया। उन्होंने कहा कि वे तीन बार जीते, दो बार हारे, जब भी हारे तो राज्यसभा सांसद बन गए और 27 साल तक वे सांसद रहे हैं। शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बेटी जूही पैदा हुई थी तो उन्हें अस्पताल से लाने के लिए 300 रुपये चाहिए थे, लेकिन इतने पैसे न होने के कारण उन्हें एक रात अस्पताल में पत्नी को रखना पड़़ा। अगले दिन 300 रुपये का जुगाड़ किया और फिर अस्पताल से छुट्टी ली।

अच्छी एक्टिंग सीख कर ही फिल्मों में जाएं
राज बब्बर से सवाल किया गया कि आप बेटी को फिल्मों में क्यों नहीं लाए तो उन्होंने जवाब दिया कि युवा चेहरे बहुत जल्द फिल्मों में आ जाते हैं, जिससे उनके कॅरिअर बनने से पहले खत्म हो जाता है। लिहाजा उन्होंने बेटी से कहा कि वह अच्छी एक्टिंग सीखकर ही फिल्मों में जाए।

राहुल बोले- पिता खुशवंत सिंह का कसौली से था गहरा नाता

12वां खुशवंत सिंह लिटफेस्ट फिर मिलने के वादे के साथ समाप्त हो गया। अंतिम दिन के सत्र में सात विषयों पर चर्चा की गई। अंतिम दिन के पहले सत्र में उपन्यासकार अमृता त्रिपाठी द हैपीनेस हाइपोथिसिस पर सारा जेकोब के साथ चर्चा की। धन्यवाद भाषण में खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह बोले कि बीते कल भारत-पाकिस्तान का मैच था। ऐसे में मुझे डर था कि श्रोता नहीं पहुंचेंगे, मगर बावजूद इसके यहां पर भीड़ रही।

उन्होंने स्थानीय लोगों, श्रोताओं और सभी वक्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का कसौली से गहरा नाता था और उन्होंने अपने अंतिम दिन यहीं बिताए थे। इससे पहले अभिनेता और कांग्रेस नेता राज बब्बर अपनी बेटी जूही बब्बर सोनी के साथ लाइव कैमरा एक्शन, विषय पर पति अनूप सोनी के साथ संवाद किया। अगले सत्र में अभिनेत्री मारिया गुरेती, ज्योतिषाचार्य कल्पेश रत्ना ने इट, ड्रिंक एंड वी मीरी फॉर टुमारो यू मेय डाइट विषय पर प्रभा चंद्रन के साथ संवाद किया।

क्रिकेटर विक्रमजीत सिंह सेवा एवे ऑफ लाइफ विषय पर चर्चा की। इसके अलावा अंजुम हसन बिंग मुस्लिम इन टुडे इंडिया विषय पर सारा जेकोब के साथ चर्चा की। इसमें आरिफ नाम के व्यक्ति के किरदार के बारे में बताया। भारतीय थियेटर निर्देशक अनुराधा कपूर, राजनेता रूपिंद्र सिंह वेयर वी बिलाैंग विषय पर महुआ चिन्नपा के साथ विचार रखे। उन्होंने गुरुनानक और सिखों के सेवा भाव पर चर्चा की।

नेपाल की लेखक किरणजीत संधु, राजन कश्यप न्यू वॉयस न्यू रेव्यूल्यूशन पर संवाद किया। शाम 5:00 बजे खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह के धन्यवाद के साथ लिटफेस्ट का समापन हो गया। इस दौरान कई विशेष मेहमानों को सम्मानित किया गया। लेखिका अंजुम हसन की किताब बिंग द मुस्लिम इन टुडे को लेकर सारा जेकोब ने संवाद किया। अंजुम हसन ने बताया कि उनकी किताब एक मुस्लिम लड़के आरिफ पर लिखी है। यह किताब उन्होंने अपने आप झेली दिक्कतों को महसूस कर लिखी।

उन्होंने कहा कि देश के आजाद होने के बाद भारत-पाकिस्तान का बंटवारा सबके लिए दुखद क्षण था। इससे मौलाना आजाद काफी टूट गए थे। अल्पसंख्यकों ने भी इसका दर्द झेला। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया किताब लिखी थी। मेरी किताब भी उसी की तरह है। इसमें बताया गया कि बंटवारे के बाद किस तरह की परेशानियां झेली गई। हिंदू-मुस्लिम विवाद पर पूछे सवाल पर उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

नेपाल की लेखिका की सिखों पर किताब
नेपाल की लेखिका किरणजीत संधु ने 1959 में कश्मीर से नेपाल गए कुछ सिखों पर लिखी किताब पर संवाद किया। उन्होंने बताया कि उस समय कश्मीर से हजारों लोग चले गए। उसमें हिंदू, सिख, ईसाई शामिल थे। उन्होंने शरणार्थियों की तरह जीवन बिताना पड़ा। उसमें एक सिख प्रीतम सिंह भी थे जिन्होंने नेपाल में जाकर वहां पर लोगों की सेवा में जिंदगी गुजार दी। प्रीतम सिंह बाद में इतने प्रसिद्ध हो गए थे कि वहां पर सिख समुदाय के लोग नेपाल के राजा को नहीं, उन्हें अपना राजा मानते थे।

शिलांग से पलायन पर चर्चा
अनुराधा और रूपिंद्र सिंह की किताबों पर चर्चा अंतिम सत्र में लेखिका अनुराधा सिंह और रूपिंद्र सिंह की किताबों पर चर्चा हुई। मोहुआ चिन्नपा ने उनसे संवाद सत्र किया। इस दौरान अनुराधा ने शिलांग पर लिखी किताब पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि किस तरह से वहां से लोग पलायन कर रहे हैं। लेखक रूपिंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अब तक कई विषयों पर किताबें लिखी है, मगर पहली बार उन्होंने गुरु नानक पर किताब लिखी है। इसमें यह बताया है कि गुरु नानक के संदेशों का अनुसरण करते हुए सिख समुदाय किस तरह लंगर चला रहा है और आपदा में सेवा के लिए तत्पर रहता है।
 

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