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पाक, कश्मीर और आतंकवाद की तपिश में घिरा लिटफेस्ट

Sat, 15 Oct 2016 10:32 AM IST
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन/कसौली
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन/कसौली Updated Sat, 15 Oct 2016 10:32 AM IST
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khushwant singh literary festival 5th season in kasauli Himachal Pradesh

सदी के महान लेखक खुशंवत सिंह ने भारत-पाक के रिश्तों को मधुर बनाने के लिए हमेशा साहित्यिक मंच से कोशिश की है। कसौली की शांत वादियों में लिटफेस्ट का मुख्य मकसद भी यही है। पांचवें लिटफेस्ट पर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का असर दिखा। अमन और चैन नहीं, बल्कि पाक, कश्मीर और आतंकवाद की तपिश में लिटफेस्ट घिरा रहा। 

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पाकिस्तानी मेहमानों से हमेशा सराबोर रहने वाले साहित्यिक मेले में उनकी कमी जरूर खली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राहुल पंडिता, दिलीप साइमन ने मंच साझा करते हुए काश्मीर: क्राई बिलवड़ कंट्री पर वर्तमान हालात पर चिंता जताई। कहा कि कश्मीर आग में जल रहा है। हालात, बेहद चिंताजनक हैं। 10 हजार से अधिक लोग घायल हैं। 95 लोग मारे जा चुके है। लॉ एंड ऑर्डर की हालात बदतर है। 
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केंद्र सरकार इसकी मुख्य वजह नहीं ढूंढ पाई है। राहुल पंडिता ने कहा कि इन हालातों पर काबू पाया जाना चाहिए। इसके लिए दोनों देशों में वार्ता जरूरी है। केवल एक मंच पर वार्ता करके ही इसका हल निकाला जा सकता है। दिलीप साइमन ने जोर दिया कि बाइलेट्रल टॉक से इसका हल संभव है। इस दौरान युद्ध जैसी स्थिति पर चिंता जताते हुए साहित्यकारों ने इसे दुखद बताया।

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हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं : उमर

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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। कारगिल मिलाकर भारत-पाक चार युद्ध झेल चुके हैं। कोई फायदा नहीं हुआ। अमन-चैन नहीं हो पाया है। अब हिंसा चरम पर है। कश्मीर जितनी आंतरिक आग से झुलस रहा है, उतनी ही बाहरी आग से भी। केंद्र की मोदी सरकार को वार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। दोनो देशों में डायलॉग जरूरी है, लेकिन सुलगते रिश्तों को सुधारने में सरकार नाकाम रही है। मोदी डायलॉग नहीं चाहते, लेकिन स्थिति को नॉर्मल बनाने के लिए भारत और पाकिस्तान को दोनों को कदम बढ़ाना चाहिए। 

पाक से खतरनाक काम कर रही महबूबा की सरकार
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाक से खतरनाक हालात जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सैय्यद की सरकार कर रही है। पाक अगर आतंकी बुरहान को शहीद का दर्जा देने पर तुला है तो यहां की सरकार यह कह रही है कि गलती से वह मारा गया है। कश्मीर में पाकिस्तान की भाषा बोलने वालों पर को सजा मिली है। ऐसा करने वाले सभी जेल के अंदर हैं। कहा कि आर्टिकल 370 एक ब्रिज की तरह काम करेगा।

सेंसर नहीं सेंसरशिप के खिलाफ हूं : श्याम बेनेगल

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पदमभूषण, दादा साहेब फालके जैसे अवार्ड हासिल करने वाले प्रसिद्ध निर्देशक का कहना है कि वह सेंसरशिप के खिलाफ हैं। अगर कोई व्यक्ति चीज बनाता है तो उसे काटने का कोई हक नहीं। उन्होंने कहा कि वह सेंसर के नहीं सेंसरशिप के खिलाफ हैं। इसके चलते उन्होंने सेंसर बोर्ड का पद ठुकराया है। उन्होंने कहा कि किसी डायरेक्टर ने पब्लिसिटी बढ़ाने के लिए यह कह दिया कि मैं पाकिस्तान एक्टर फवाद के साथ फिल्म बनाने का इच्छुक हूं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। यह एक पब्लिसिटी स्टंट है। उन्होंने कहा कि बाब ढिल्लों को नोबेल पुरस्कार देना बढ़िया निर्णय है। वह उसके हकदार थे।

नाम बदलने से कुछ नहीं होगा परिणामों से मतलब : मोंटेक
कसौली (सोलन)। राष्ट्रीय योजना समिति के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया ने कहा कि योजना आयोग को नीति आयोग में बदलने से कुछ नहीं होगा, परिणाम बेहतर आने चाहिए। लेबर लॉ लचीला होना चाहिए। मौजूद लॉ में संशोधन की जरूरत है। गुड्स सर्विस टैक्स भारत के व्यापार जगत को नए मायने देगा। हो सकता है कि शुरू के कुछ सालों में इसके सकारात्मक परिणाम न दिखे, लेकिन बाद में परिणाम बेहतर होंगे। 

यह हर बिजनेस सेक्टर के लिए फायदेमंद होगा। कहा कि बीजेपी सरकार की पंद्रह साल की विजन रिपोर्ट के आरंभिक परिणामों से इसके सफल और असफल होने का अंदाजा लगाया जा सकेगा। सात फीसदी ग्रोथ रेट अब तक संतोषजनक है। लिटफेस्ट का दायरा बढ़ता जा रहा है। यह पहले चंद मुद्दों पर सीमित था। अब करंट अफेयर, मनोरंजन और महिला सशिक्तकरण की तरफ इसके कदम अग्रसर हैं। 

मोदी कह रहे हैं तो हमें मान लेना चाहिए सर्जिकल स्ट्राइक: खुर्शीद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की विस ए वाया ब्लूचिस्तान और पाकिस्तान की पॉलिसी को एक अनाड़ी की फॉरेन पॉलिसी कहने वाले पूर्व कानून एवं विदेश मंत्री अब कह रहे हैं कि अगर मोदी कह रहे हैं तो मान लेना चाहिए कि सर्जिकल स्ट्राइक हुए हैं। हालांकि, कांग्रेस सरकार पहले भी इस तरह के हमले करती आ रही है, लेकिन अब अमेरिका के सर्जिकल स्ट्राइक को अपने अंदाज में मोदी की सरकार इसे परिभाषित कर रही है। 

उन्होंने प्रश्नात्मक लहजे में कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से लक्ष्य यानी कश्मीर और आतंकवाद का मुद्दा सुलझ गया। शुक्रवार को खुशवंत सिंह के लिटफेस्ट में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस की साख घटना, एक चिंता का विषय है। कांग्रेस एक मजबूत संगठन है। आजादी से लेकर अब तक भारत को विकास के नए आयाम तक पहुंचाने वाली पार्टी जल्द संगठित होकर उभरेगी। 

संविधान के अधिकार जो मिले हैं, वो सुनिश्चित करने के लिए किसी ने प्रयास किया है तो वह कांग्रेस है। यूपी इलेक्शन में पिछले दो दशकों में कांग्रेस का बड़ा चेहरा नहीं दिखा है, लेकिन इस बार राज बब्बर और शीला दीक्षित जैसे चेहरे कमबैक करने को तैयार हैं। कहा कि लिटफेस्ट में पाक कलाकारों के ना आने से दोनों देशों के साहित्यिक मंच पर करीब लाने की कवायद को धक्का लगा है। 

तीन तलाक पर भी ठीक है
मुस्लिम लॉ में तीन बार तलाक कहने पर तलाक के विवाद को लेकर खुर्शीद कहते हैं कि अगर एक बार तलाक कहते हैं तो तीन माह तक उसे वापस लेने का हक होता है। अगर तीन बार कह दें तो वह तलाक है। उन्होंने कहा कि जैसे निकाहनामा में दोनों वर वधू की सहमति होती है, उसी तरह मुस्लिम लॉ में तलाक पर भी दोनों की सहमति होनी चाहिए। 

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