बिना मंजूरी दे दिए 303 करोड़ के लोन, 48 लोन चल रहे एनपीए में
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राजनीति और भाई-भतीजावाद की सियासी चक्की में पिस रहे केसीसी बैंक में पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत 336 में से 294 लोन के मामलों में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।
303 करोड़ के 294 लोन आरबीआई और नाबार्ड के नियम दरकिनार कर बांट दिए गए। 294 में से 48 ऋणधारकों ने बैंक का करीब 47 करोड़ रुपया वापस ही नहीं किया और यह धनराशि एनपीए में चली गई।
रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने निर्देश जारी किए थे कि केसीसी बैंक किसी फर्म या ट्रस्ट के अलावा व्यक्ति विशेष को 40 लाख रुपये से ज्यादा का ऋण नहीं दे सकता है।
अगर किसी व्यक्ति विशेष ने 40 लाख रुपये से ज्यादा लोन लेना हो तो उसकी मंजूरी नाबार्ड देगा, लेकिन केसीसी बैंक ने नाबार्ड की मंजूरी के बिना ही पिछले पांच वर्ष में 294 लोन लोगों को बांट दिए।
एमडी और जीएम देते हैं लोन
अब सवाल यह उठता है कि केसीसी बैंक ने नाबार्ड की मंजूरी के बिना करोड़ों के लोन किसके दबाव में बांट दिए। कहीं इसके पीछे बैंक के कर्मचारियों-अफसरों और बीओडी में मिलीभगत से रिश्वत का खेल तो नहीं चल रहा था।
बैंक के चेयरमैन जगदीश सिपहिया ने कहा कि लोन एमडी और जीएम देते हैं। इसमें बैंक के चेयरमैन का कोई रोल नहीं होता है। हालांकि केसीसी बैंक स्वायत्त संस्था है। बैंक की उन्नति के लिए उसे अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता है।