जश्न में डूबे शिमला में बसे कश्मीरी पंडित, बोले-अब मिली है पूरी आजादी
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जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और केंद्र शासित राज्य बनाने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद शिमला में बसे कश्मीरी पंडित जश्न में डूब गए। कश्मीरी पंडितों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।
केंद्र के फैसले के बाद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की उम्मीद जग गई है। शिमला की कश्मीरी सभा ने कहा कि 99 फीसदी लोग 30 साल पहले घर छोड़ने को मजबूर हो गए थे। खाली हाथ कश्मीरी पंडित देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर बसने को विवश हुए थे।
यह पलायन कई सालों तक जारी रहा। पिछली सरकारें यदि ऐसा कोई फैसला लेती तो हालात सुधर सकते थे। देश 70 साल तक खंडित रहा। अब ताजा फैसले के बाद बाहर के लोगों के कश्मीर में बसने का रास्ता खुलेगा। कश्मीर का विकास संभव हो सकेगा।
यह फैसला ऐतिहासिक
कश्मीर में पैदा हुए कैथू वार्ड से भाजपा पार्षद सुनील धर ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है। पहले की सरकारों ने ऐसी हिम्मत नहीं दिखाई। मेरे जैसे 99 फीसदी कश्मीरी पंडित घर छोड़ने को मजबूर हुए। कश्मीर में हमारी संपत्तियां थीं जो कब्जा ली गई। अब इस फैसले से विस्थापितों की घर वापसी की राह खुलेगी।
पहले खंडित था देश, अब बना संपूर्ण भारत
शिमला में कश्मीरी सभा अध्यक्ष एवं सीआईडी एडीजीपी के पद से रिटायर हुए बीएल पंडित ने कहा कि कश्मीर को लेकर 70 साल पहले जो गलती हुई थी, उसे अब सुधारा गया है। यह फैसला पहले होना चाहिए था। एक देश, एक संविधान, एक झंडा अब लागू होगा। पहले भारत खंडित था जो अब एक हो गया है।
कश्मीर और देश को होगा फायदा
राजधानी में बसे कश्मीर के जवाहर कौल ने कहा कि कश्मीर पर तीन राज्यों के बराबर पैसा खर्च होता था। लेकिन नतीजा नहीं मिल रहा था। धारा 370 के संबंध में लोगों को गुमराह किया जाता रहा। अब केंद्र शासित राज्य बनने से कश्मीर और देश के विकास की राह आसान हो जाएगी।
अब वापस मिला है देश का मुकुट
कश्मीरी विस्थापित सुशील कौल ने कहा कि यह गोल्डन आजादी है। देश को कश्मीर के रूप में मुकुट वापस मिल गया है। इस फैसले से अलगाववादियों की कमर टूटेगी जो धारा 370 की आड़ में दुकान चला रहे थे। 30 साल से कश्मीरी पंडित अज्ञातवास में है लेकिन इस फैसले से उनके लौटने की उम्मीद जगी है।