युवाओं को बताई जाए शहीदों की वीरगाथा, शहीद स्मारक बनाने की मांग
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पुलिस विभाग में कार्यरत शहीद श्याम सिंह की बहन रोशनी कहती हैं कि भाई की शहादत भले ही सरकार साल दर साल भुला रही हो लेकिन परिवार को उनकी शहादत पर नाज है।
26 जुलाई को मनाए जाने वाले कारगिल शौर्य दिवस को विशेष दिवस का दर्जा देकर इसे एक अलग अंदाज में मनाए जाने के लिए सरकार को योजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र से शहीदों का संबंध हो, वहां विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर शहीदों की वीरगाथा से युवाओं को अवगत करवाया जाए।
नेरवा में शहीद के नाम पर स्मारक बनाई जाए। श्याम सिंह देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाला उपमंडल चौपाल का दूसरा शहीद है। इससे पहले कुपवी क्षेत्र के लेफ्टिनेंट हरी सिंह भी कारगिल में शहादत दे चुके हैं।
1999 में कारगिल युद्ध में शहीद श्याम सिंह के बलिदान को कभी भी नहीं भुलाया जा सकता। श्याम सिंह ने पांच जुलाई 1999 के दिन दुश्मन के साथ लोहा लेते हुए देश को अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
श्याम सिंह ने एक दुश्मन को ढेर कर दूसरे को घायल कर दिया
जैक 13 राइफल की चार्ली कंपनी में शामिल श्याम सिंह टाइगर हिल की प्वाइंट 4875 चोटी को दुश्मन से आजाद करवाने के लिए अपने दल के साथ आगे बढ़ रहे थे। श्याम सिंह ने बहादुरी का परिचय देते हुए एक दुश्मन को ढेर कर दूसरे को घायल कर दिया।
सेना की इस कंपनी ने प्वाइंट 4875 को दुश्मन के कब्जे से मुक्त करा लिया था। इस दौरान श्याम सिंह दुश्मन की ओर से चलाई गई स्पाइनर राइफल की गोली से देश के लिए कुर्बान हो गए।
श्याम सिंह का जन्म 26 जनवरी 1974 को नेरवा के समीप कलारा गांव में देवकू देवी और नंद राम भिख्टा के घर हुआ था। श्याम सिंह की शहादत के बाद विशेष सेना मेडल वीर चक्र प्रदान किया गया। प्रदेश सरकार ने श्याम सिंह के भाई को राजस्व विभाग में नौकरी दी।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नेरवा का नाम वीर चक्र शहीद श्याम सिंह के नाम पर रखा गया। श्याम सिंह के भाई रमेश भिख्टा अब सरकारी नौकरी छोड़ पेट्रोल पंप का कामकाज संभाल रहे हैं।