कांगड़ा घाटी में 147 किलोमीटर ही दौड़ सकी 'चुनावी एक्सप्रेस'
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कांगड़ा घाटी की लाइफलाइन पठानकोट-पपरोला रेलवे ट्रैक पर दौड़ने वाली जयराम सरकार की चुनावी एक्सप्रेस ट्रेन के पहिए 147 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद थम गए हैं। एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी मिलने के बाद करीब दो माह से ट्रेन नहीं चली है। न ही किसी ने ट्रेन का टिकट बुक करवाया है।
जोगिंद्रनगर से पठानकोट तक का 164 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक चुनावों के समय राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी मुद्दा बनता रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में भी ट्रैक को ब्रॉडगेज करने का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में हावी रहा था। ट्रैक पर स्टीम इंजन तो कभी कांगड़ा क्वीन की शुरुआत करने के प्रयास किए जा चुके हैं।
पिछली 6 फरवरी को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पुराने डब्बों को आधुनिक रूप देकर रेलवे बोर्ड के तैयार चार डब्बों की एक्सप्रेस ट्रेन नंबर-52476 को हरी झंडी देकर पपरोला से रवाना किया था। सायं पांच बजे पपरोला से रवाना हुई ट्रेन के पहिए उसके बाद ट्रैक पर नहीं दौड़ सके हैं। गर्मियों में पर्यटकों को लुभाने के लिए शुरू हुई ट्रेन पर लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन, अब तक रेलवे बोर्ड इसके लिए एक भी टिकट की बिक्री नहीं कर सका है।
मलबे से बंद पड़ा है ट्रैक
कोपर लाहड और ज्वालामुखी के मध्य ट्रैक पर पहाड़ी का मलबा आने से ट्रैक आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद हो गया है। वर्तमान में रोजाना पठानकोट से पांच ट्रेन ज्वालामुखी तक आ रही हैं और पपरोला से तीन ट्रेन कोपरलाहड़ तक जा रही हैं। रेलवे बोर्ड के कनिष्ठ अभियंता एच सिंह ने बताया कि 15 अप्रैल तक ट्रैक के बहाल होने की उम्मीद है।
एसी कोच का नहीं हुआ किराया तय
मात्र चार स्टेशनों पालमपुर, नगरोटा बगवां, कांगड़ा और ज्वालामुखी में रुकने वाली एक्सप्रेस ट्रेन ने पठानकोट से पपरोला तक का सफर सात घंटों के बजाय पांच घंटों में तय करना था। साधारण कोच का किराया 60 रुपये तय किया गया है, जबकि एसी कोच का किराया अब तक तय ही नहीं हो पाया है।