हमीरपुर: सहकारी सभाओं का नहीं काटा टीडीएस, केसीसी बैंक को हो सकता है करोड़ों का नुकसान
रिजर्व बैंक की गाइडलाइन और फाइनेंस अधिनियम-2020 में किए गए संशोधन के अनुसार अनुच्छेद 194-ए के तहत कोई भी सोसायटी जिसका टर्नओवर 50 करोड़ से ऊपर है और वह अपने सदस्यों या अपने अधीन आने वाली सोसायटियों को ब्याज प्रदान कर रही हैं तो उन्हें टीडीएस देना अनिवार्य है।
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हिमाचल प्रदेश के अग्रणी कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक और सूबे की सहकारी सभाओं के बीच टीडीएस को लेकर नूरा-कुश्ती चल रही है। सहकारी सभाओं के प्रबंधकों के भारी दबाव के चलते कांगड़ा बैंक का निदेशक मंडल टीडीएस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाया है। अगर मार्च माह तक केसीसी बैंक ने सोसायटी की ओर से जमा करवाए बैंक डिपोजिट पर टैक्स नहीं काटा तो बैंक को पेनल्टी के रूप में 100 से 400 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि पूर्व में सर्कुलर भी जारी हो चुके हैं। रिजर्व बैंक की गाइडलाइन और फाइनेंस अधिनियम-2020 में किए गए संशोधन के अनुसार अनुच्छेद 194-ए के तहत कोई भी सोसायटी जिसका टर्नओवर 50 करोड़ से ऊपर है और वह अपने सदस्यों या अपने अधीन आने वाली सोसायटियों को ब्याज प्रदान कर रही हैं तो उन्हें टीडीएस देना अनिवार्य है। इसके बावजूद कांगड़ा केंद्रीय बैंक ने अभी तक सोसायटियों की ओर से बैंक में जमा करवाई जा रही राशि पर टैक्स नहीं काटा है।
सूबे में वर्तमान में पांच हजार से अधिक विभिन्न सोसायटियां हैं। इनमें से अधिकतर वित्तीय लेनदेन के कार्य में शामिल हैं। ऐसी भी शिकायतें मिलती रही हैं कि कई पूंजीपति लोग अपने कालेधन को ठिकाने लगाने के लिए इन सोसायटियों का सहारा लेते रहे हैं। वहीं, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की प्रदेशभर में 220 के करीब बैंक शाखाएं और 12 एक्सटेंशन काउंटर हैं।
बैंक ने सहकारी सभाओं की जमाराशि पर टीडीएस काटने की प्रक्रिया अभी तक होल्ड की हुई है। जैसे ही ऊपर से निर्देश मिलेंगे, आगामी निर्णय लिया जाएगा। हां, नियमों के तहत टीडीएस काटा जाना जरूरी है। अभी चुनाव प्रचार ड्यूटी के चलते प्रदेश से बाहर हूं, वापसी पर शीघ्र उचित निर्णय लिया जाएगा। - राजीव भारजद्वाज, चेयरमैन, केसीसी बैंक धर्मशाला